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डोनाल्ड ट्रंप कर रहे नौसेना जहाज का नाम खुद पर रखने की तैयारी, बढ़ा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे नौसेना जहाज का नाम खुद पर रखने की तैयारी

डोनाल्ड ट्रंप कर रहे नौसेना जहाज का नाम खुद पर रखने की तैयारी, बढ़ा विवाद

Aug 22, 2026
04:01 pm

क्या है खबर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नौसेना के एक अत्याधुनिक विमानवाहक पोत का नाम बदलकर अपने नाम पर रखने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्धपोत का नाम मूल रूप से 'USS डोरिस मिलर' तय किया गया था। डोरिस मिलर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पर्ल हार्बर पर हुए जापानी हमले में अदम्य साहस दिखाने वाले एक अश्वेत नौसैनिक थे। ट्रंप के इस कदम की अमेरिका में पूर्व सैनिकों और मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना शुरू कर दी है।

विवाद

इस बात लेकर है विवाद

अमेरिकी नौसेना के इतिहास में पहले कभी भी किसी विमानवाहक पोत का नाम किसी पद पर बने राष्ट्रपति के नाम पर नहीं रखा गया है।

इसके अतिरिक्त, अमेरिकी नौसेना की यह स्थापित परंपरा रही है कि वह अपने बड़े युद्धपोतों का नाम अमेरिकी सैन्य इतिहास से जुड़े नायकों या संस्थानों पर रखती है, न कि वर्तमान राष्ट्रपति के व्यक्तिगत नाम पर।

ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप के इस प्रयास ने देश के सैनिकों की भावनाओं पर सीधी चोट पहुंचाई है।

बयान

यह हर युद्ध नायक के मुंह पर तमाचा - NAACP

नागरिक अधिकार संगठन NAACP के अध्यक्ष डेरिक जॉनसन ने इस योजना की कड़े शब्दों में निंदा की है।

उन्होंने कहा, "यह वर्दी पहनने वाले हर युद्ध नायक और सेवा सदस्य के मुंह पर एक तमाचा है। डोरिस मिलर ने अपने साहस, बलिदान और सेवा से अमेरिकी इतिहास में अपना स्थान अर्जित किया था, जबकि ट्रंप केवल अपनी सेवा करना चाहते हैं।"

CNN की इस रिपोर्ट पर अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

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परिचय

कौन थे पर्ल हार्बर के नायक डोरिस मिलर?

7 दिसंबर, 1941 को जब जापानी सेना ने पर्ल हार्बर पर अचानक हमला किया, तब डोरिस मिलर अमेरिकी युद्धपोत 'USS वेस्ट वर्जीनिया' पर एक नौसैनिक रसोइया के रूप में तैनात थे।

हथियारों को चलाने का कोई औपचारिक प्रशिक्षण न होने के बावजूद, हमले के दौरान मिलर ने मोर्चे पर जाकर एक एंटी-एयरक्राफ्ट मशीन गन संभाली और जापानी विमानों पर अंधाधुंध फायरिंग की।

उन्होंने दुश्मन की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए जहाज के कप्तान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

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जानकारी

'नेवी क्रॉस' से सम्मानित हुए थे मिलर

मिलर को अपनी असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें 'नेवी क्रॉस' से सम्मानित किया गया था। वह द्वितीय विश्व युद्ध के सबसे प्रमुख अश्वेत अमेरिकी सैनिक बनकर उभरे। 1943 में एक जापानी पनडुब्बी के हमले में मिलर शहीद हो गए थे।

कारण

क्या है विवाद का असली कारण?

आलोचकों और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि मिलर का नाम हटाकर ट्रंप का नाम रखना एक ऐसे बहादुर सैनिक के सम्मान को मिटाने जैसा है, जिसकी वीरता ने अमेरिकी सेना के भीतर नस्लीय बाधाओं और भेदभाव को चुनौती देने में मदद की थी।

अमेरिकी सैनिकों के रहने की खराब स्थितियों के बीच राष्ट्रपति द्वारा अपने नाम की ब्रांडिंग करने को लेकर सेना से जुड़े संगठनों में भारी रोष है।

इससे देश में बड़ा विवाद छिड़ने की आशंका है।

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