क्या चीन ने समय पर नहीं दी नेपाल को बाढ़ की चेतावनी, क्यों उठ रहे सवाल?
क्या है खबर?
नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे इलाकों में आई बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 350 को पार कर गया है। 16,00 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल युद्धस्तर पर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। इस बीच चीन की भूमिका सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि चीन ने समय रहते नेपाल को बाढ़ की चेतावनी नहीं दी।
बांध
चीन द्वारा बनाए जा रहे बांध पर भी उठे सवाल
कई लोगों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि चीन में स्थित एक 'भूवैज्ञानिक आपदा बांध' के ढहने से नेपाल में तबाही हुई।
खुद को खोजी पत्रकारिता का मंच बताने वाले नेपाल कॉरेस्पोंडेंस ने दावा किया कि अचानक आई बाढ़ तिब्बत सीमा के पास चीनी निर्माण से जुड़ी एक 'जानबूझकर की गई पारिस्थितिक आपदा' थी।
मंच ने दावा किया कि चीनी शियाओकांग बस्तियों के कारण हुई पारिस्थितिक आपदा चीन-नेपाल सीमा पर हर साल हिमस्खलन की वजह बनती है।
चेतावनी
क्या चीन ने समय पर नहीं दी चेतावनी?
लोगों ने दावा किया कि जब रसुवागढ़ी-ग्यिरोंग और ग्यिरोंग बंदरगाह बाढ़ से प्रभावित हुई, तभी चीन चेतावनी जारी कर सकता था।
स्थानीय समाचार पत्र उकेरा के अनुसार, तिब्बत के केरंग में सुबह लगभग 10:30 बजे बाढ़ आई, जब नेपाल में सुबह के 8:15 बज रहे थे। इसके 45 मिनट बाद, यह बाढ़ नेपाल की भोटे कोशी नदी प्रणाली में फैल गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आपदा की जानकारी नेपाल को स्थानीय लोगों से मिली, न कि चीन से।
बयान
नेपाली पत्रकार बोले- उत्तरी पड़ोसी ने धोखा दिया
नेपाली पत्रकार परशुराम काफले ने लिखा, 'नेपाल अपने पड़ोसियों की जायज सुरक्षा चिंताओं का समाधान करता रहा है। हालांकि, बड़े दुख के साथ कहना पड़ेगा कि हमारे उत्तरी पड़ोसी ने धोखा दिया है। इतनी बड़ी आपदा की पूर्व सूचना न देकर हमने भारी जानमाल का नुकसान झेला है। हमें लगातार उनके क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले संकटों का सामना करना पड़ा है, जबकि हम उनकी सभी चिंताओं का समाधान करते आ रहे हैं।'
चीन
आरोपों पर चीन का क्या कहना है?
नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने चेतावनी नहीं देने से जुड़ी रिपोर्टों को खारिज कर दिया है।
दूतावास ने कहा, "नेपाल की ओर भूकंप या भूकंप जैसी हिमनद के ढहने की घटना हुई, जिससे भारी भूस्खलन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप भारी जानमाल का नुकसान हुआ।"
नेपाल में चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने NDTV से कहा, "चीनी दूतावास ने तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय किया, प्रभावित नागरिकों-उद्यमों की स्थिति का आकलन किया और सरकार से बचाव अभियान के लिए प्रयास का अनुरोध किया।"