बांग्लादेश में खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की वापसी, क्यों भारत के लिए अच्छी खबर?
क्या है खबर?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान गुरुवार को 2 दशक बाद ढाका लौट आए हैं। वह अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा रहमान के साथ बांग्लादेश वापस लौटे हैं। करीब 17 साल लंदन में निर्वासित रहे रहमान की ढाका वापसी भारत के लिए कितनी अहम है? आइए जानते हैं।
बयान
मेरे पास एक प्लान है- रहमान
ढाका में हजारों समर्थकों के सामने बोलते हुए रहमान ने कहा कि बांग्लादेश के लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार और बोलने की आजादी वापस चाहते हैं। अमेरिका के दिवंगत नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के मशहूर "मेरा एक सपना है" भाषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मेरे पास एक प्लान है," और इसकी सफलता लोगों के सामूहिक समर्थन पर निर्भर है। उन्होंने पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और नागरिकों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनकी गैरमौजूदगी में BNP का साथ दिया।
निर्वासन
रहमान की वापसी से क्या होगा असर?
बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान बड़े बेटे रहमान को स्थानीय लोग तारिक जिया पुकारते हैं। आवामी लीग के शासन में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की कार्रवाईयों से बचने के लिए रहमान 2008 में लंदन गए थे और वहीं से पार्टी चला रहे थे। उनके ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग और हसीना पर हमले की साजिश का आरोप था। हालांकि, तख्तापलट होते ही कोर्ट ने रहमान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अब उनका ढाका आने का रास्ता साफ है।
वापसी
बांग्लादेश में रहमान की वापसी के क्या है मायने?
बांग्लादेश सरकार की अंतरिम सरकार ने 12 फरवरी, 2026 को आम चुनाव की घोषणा की है। जुलाई में हसीना के तख्तापलट के बाद से देश में हालात ठीक नहीं है। ऐसे में जब भारत समर्थक आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, तब देश की दूसरी बड़ी पार्टी BNP को आगे बढ़ने का मौका मिला है। हाल में एक जनमत सर्वेक्षण से पता चला है कि रहमान की पार्टी को चुनावों में अधिकतम सीटें मिलने की संभावना है।
मायने
रहमान की वापसी का भारत पर क्या होगा असर?
हसीना के देश निकाला और उनके चुनाव पर प्रतिबंध लगाने के बाद पाकिस्तान समर्थक जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश में सिर उठा रही है। हसीना के समय जहां, बांग्लादेश ने पाकिस्तान से सुरक्षित दूरी बनाई थी, वहीं मोहम्मद यूनुस ढाका-इस्लामाबाद को पास लाए हैं। इस बीच ढाका विश्वविद्यालय चुनावों में जमात छात्र संगठन की अप्रत्याशित जीत ने भारत को चिंता में डाला है। ऐसे में जमात के मुकाबले BNP को भारत में अधिक उदार और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
संबंंध
जमात से भी गठबंधन को नकार चुके हैं रहमान
रहमान के बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस से भी मतभेद रहे हैं। उन्होंने यूनुस को दीर्घकालिक विदेश नीति संबंधी निर्णय लेने के अधिकार पर भी सवाल उठाए हैं। रहमान जमात के भी आलोचक रहे हैं। उन्होंने चुनावों के लिए किसी के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। इस साल लंदन में रहमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' नारे की तर्ज पर 'बांग्लादेश फर्स्ट' विदेश नीति की रूपरेखा तैयार की थी।
वापसी
कैसे हैं भारत और BNP के बीच संबंध?
जिया परिवार और भारत के रिश्ते तनावपूर्ण नहीं रहे हैं। जहां हसीना परिवार का संबंध भारत से आत्मीय है, वहीं जिया परिवार ने भी सौहार्दपूर्ण रिश्ते रखे हैं। इसकी बानगी 1 दिसंबर को दिखी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया की बीमारी पर चिंता जताई और भारतीय समर्थन की पेशकश की। तब BNP ने उनका आभार जताया था। अगर बांग्लादेश में BNP जीती, तो ढाका की विदेश नीति में बदलाव दिखेगा, लेकिन भारत की विरोधी नीति कम होगी।
चुनाव
कहां से लड़ेंगे चुनाव?
रहमान शनिवार को अपना बांग्लादेशी नेशनल पहचान पत्र और वोटर रजिस्ट्रेशन पूरा करेंगे। वे ढाका यूनिवर्सिटी में हाल में मारे गए स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी की कब्र पर जाएंगे। साथ ही जुलाई के विद्रोह में घायल लोगों से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉमाटोलॉजी में मिलेंगे। रहमान को बोगुरा-6 (सदर) सीट से मैदान में उतारे जाने की संभावना है। उनकी मां और BNP अध्यक्ष जिया फिर से अपने गढ़ बोगुरा-7 (गबताली-शाहजहांपुर) निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी।
पहचान
2008 में इलाज के लिए लंदन गए थे रहमान
रहमान को 2007 में भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। हिरासत में उन्हें यातना दी गई, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्हें जमानत मिल गई। वे इलाज के लिए 2008 में लंदन गए और तब से वहीं थे। उन्हें 2004 में ढाका में आवामी लीग की रैली में ग्रेनेड हमले के मामले में उनकी अनुपस्थिति में ही सजा सुनाई गई थी। हमले में हसीना बच गई थीं, लेकिन 26 लोग मारे गए थे।