पाकिस्तान ने आर्थिक तंगी के बीच डिजिटल क्रिएटर्स को बनाया निशाना, लागू किया नया डिजिटल टैक्स
क्या है खबर?
गंभीर आर्थिक संकट और नकदी की किल्लत से जूझ रही पाकिस्तान सरकार ने अब अपने देश के तेजी से बढ़ती सोशल मीडिया क्रिएटर इकोनॉमी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। फर्स्टपोस्ट की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की शीर्ष राजस्व एजेंसी फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) ने टैक्स का दायरा बढ़ाने के लिए यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक क्रिएटर्स के लिए एक नया डिजिटल टैक्स ढांचा लागू कर दिया है। इससे डिजिटल क्रिएटर्स में खलबली मच गई है।
फॉर्मूला
क्या है FBR का नया टैक्स फॉर्मूला?
FBR द्वारा 23 सितंबर को अधिसूचित नियमों के अनुसार, डिजिटल क्रिएटर्स की हर 1,000 व्यूज पर 195 पाकिस्तानी रुपया न्यूनतम कमाई मानी जाएगी।
क्रिएटर को मिली वास्तविक रकम या 195 रुपया प्रति 1,000 व्यूज फॉर्मूला, दोनों में से जो भी अधिक होगा, उसे कुल राजस्व माना जाएगा।
वीडियो बनाने में आने वाले खर्च (कैमरा, एडिटर, टीम आदि) की छूट को अधिकतम 30 प्रतिशत पर सीमित कर दिया गया है। ऐसे में वास्तविक कमाई का 70 प्रतिशत हिस्सा टैक्स योग्य होगा।
अन्य
क्रिएटर्स पर WHT भी लगेगा
नए नियमों के अनुसार, क्रिएटर्स पर विथहोल्डिंग टैक्स (WHT) भी लगाया जाएगा। इसमें क्रिएटर्स के बैंक खातों में विदेशी प्लेटफॉर्म से पैसा आते ही संबंधित बैंक सबसे पहले 5 प्रतिशत टैक्स पहले ही काट लेंगे।
उदाहरण के तौर पर अगर, किसी पाकिस्तानी क्रिएटर के वीडियो पर 10 लाख व्यूज आते हैं, तो FBR नियमों के मुताबिक उसकी न्यूनतम कमाई 1.95 लाख रुपये मान ली जाएगी।
उसके बाद क्रिएटर्स से इसी आधार पर टैक्स वसूला जाएगा।
कानून
किन क्रिएटर्स पर लागू होगा यह कानून?
यह नया टैक्स कानून उन सभी स्थानीय और अनिवासी व्यक्तियों पर लागू होगा जो पाकिस्तानी उपभोक्ताओं के साथ जुड़कर कमाई कर रहे हैं।
इसके लिए सरकार ने 2 सीमाएं तय की हैं, जिनमें एक वित्तीय वर्ष के भीतर 50,000 से अधिक यूजर्स या सब्सक्राइबर्स का होना और किसी एक तिमाही में 12,250 से अधिक एक्टिव यूजर्स का जुड़ाव होना शामिल है।
गूगल के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में वर्तमान में 1.40 लाख से ज्यादास यूट्यूब चैनल्स संचालित हो रहे हैं।
नाराजगी
नए कानून को लेकर क्रिएटर्स में है नाराजगी
इस कानून को लेकर क्रिएटर्स और उद्योग विशेषज्ञों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
उनका कहना है कि 1,000 व्यूज पर 195 रुपये की कमाई मानना वास्तविक नहीं है। तीन क्रिएटर्स ने निक्केई एशिया को बताया कि 70 सेंट के बराबर का यह मानक बहुत अधिक और अनुचित है।
एक क्रिएटर ने कहा, "पाकिस्तानी क्रिएटर्स द्वारा बनाए गए और पाकिस्तानी दर्शकों द्वारा देखे जाने वाले वीडियो के लिए भुगतान दर बहुत कम है। FBR की गणना वास्तविक नहीं है।"
सवाल
क्रिएटर्स ने निर्माण लागत को निश्चित करने पर उठाए सवाल
विशेषज्ञों का तर्क है कि वीडियो एडिटिंग, महंगे उपकरण और टीम को वेतन देने में 60 से 70 प्रतिशत तक खर्च हो जाता है। खर्च की छूट को केवल 30 प्रतिशत तक निश्चित करना डिजिटल उद्योग को बंद करने जैसा है।
टैक्स सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि इस कड़े कानून के कारण पाकिस्तान के शीर्ष क्रिएटर्स अपने बिजनेस, कानूनी ढांचे और बैंकिंग व्यवस्था को दूसरे देशों में स्थानांतरित कर सकते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा राजस्व भी ठप हो जाएगा।
अवैध
अवैध रास्तों को मिलेगा बढ़ावा
इस्लामाबाद स्थित संचार रणनीतिकार फरहाद अहमद जर्राल ने तर्क दिया कि बैंकों द्वारा अतिरिक्त कटौती किए जाने से लोग वैध बैंकिंग चैनलों के बजाय क्रिप्टोकरेंसी या हवाला जैसे अवैध रास्तों से अपनी कमाई घर मंगाना शुरू कर सकते हैं, जिससे सरकार का डिजिटल कंटेंट को कानून के दायरे में लाने का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
इससे सरकार का कंट्रेट क्रिएटरों से कमाई करने का सपना भी टूट जाएगा और पहले से अधिक आर्थिक नुकसान भी होगा।