
दक्षिण चीन सागर: चीन की दादागिरी के जबाव में अमेरिका ने भेजे दो युद्धपोत
क्या है खबर?
दुनिया के सबसे विवादित इलाकों में शामिल दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ता जा रहा है। इलाके में चीन के नौसेना अभ्यास के जबाव में अमेरिका ने भी अपने दो विमानवाहक युद्धपोत और चार जंगी जहाज भेजे हैं।
ये युद्धपोत यहां सैन्य अभ्यास कर रहे हैं और उनके इस अभ्यास को चीन के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है जो इलाके के छोटे-छोटे देशों पर दादागिरी दिखा रहा है।
विवाद
क्या है दक्षिण चीन सागर का विवाद?
दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर में स्थित 35 लाख वर्ग किलोमीटर का इलाका है जिसमें कई छोटे-छोटे द्वीप समूह हैं। सागर में प्राकृतिक संसाधनों का एक बड़ा भंडार है और ये व्यापारिक रूप से भी महत्वपू्र्ण है।
चीन ऐतिहासिक 'नाइन डैश लाइन' के जरिए दक्षिण चीन सागर के 90 प्रतिशत इलाके को अपना बताता है।
इसके अलावा ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम भी इलाके के हिस्सों पर अपना दावा करते हैं और उनका चीन के साथ विवाद है।
युद्धाभ्यास
विवादित इलाके में युद्धाभ्यास कर रही है चीन की नौसेना
अपनी बढ़ती सैन्य ताकत का फायदा उठाते हुए चीन इलाके पर दावा करने वाले देशों पर पिछले कई साल से लगातार दादागिरी दिखा है और कोरोना वायरस के इस वैश्विक संकट के समय भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है।
1 जुलाई से चीन की नौसेना इलाके के परासेल द्वीप समूह के पास युद्धाभ्यास कर रही है जिस पर वियतनाम भी अपना दावा करता है। ये युद्धाभ्यास 5 जुलाई तक चलना है।
अमेरिका का जबाव
अमेरिका ने इलाके में अपने युद्धपोत भेजे
चीन के इस युद्धाभ्यास के जबाव में अमेरिका ने भी अपने दो विमानवाहक युद्धपोत और चार जंगी जहाज इलाके में भेजे हैं। अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के USS रोनाल्ड रीगन और USS निमित्ज युद्धपोत अन्य चार जंगी जहाजों के साथ अभ्यास कर रहे हैं।
अमेरिका ने कहा है कि उसका मकसद इलाके के हर देश को उड़ान भरने, समुद्री इलाके से गुजरने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक संचालन करने में मदद प्रदान करना है।
बयान
अमेरिका इलाके की सुरक्षा और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्ध- अधिकारी
रीयर एडमिरल जॉर्ज एम विकॉफ ने कहा कि इस अभ्यास का मकसद हमारे सहयोगियों और साथियों को स्पष्ट संदेश देना है कि अमेरिका इलाके की सुरक्षा और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के इस अभ्यास को चीन के अभ्यास के जबाव के तौर पर नहीं देना जाना चाहिए।
खबरों के अनुसार, अमेरिका ने इस अभ्यास की तैयारी पहले से कर रखी थी, लेकिन चीन को कड़ा संदेश देने के लिए इसे अभी किया जा रहा है।
विवाद
अमेरिका और चीन में लगातार बढ़ रहा है विवाद
गौरतलब है कि व्यापार को लेकर पहले से ही आमने-सामने चल रहे अमेरिका और चीन में कोरोना वायरस और चीन के आक्रामक रवैये के कारण टकराव और बढ़ा है। अमेरिका ने अपने सेनाओं को यूरोप से हटाकर चीन के आसपास लगाने का एक बड़ा फैसला भी लिया है।
शुक्रवार को ही अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि चीन का सैन्य अभ्यास बहुत ही भड़काने वाला है और अमेरिका चीन के गैरकानूनी दावों का विरोध करता है।