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तख्तापलट के आरोप, राष्ट्रपति का विमान बीच रास्ते से लौटा; अब पोलैंड में क्यों भड़की हिंसा?
पोलैंड में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच टकराव बढ़ गया है

तख्तापलट के आरोप, राष्ट्रपति का विमान बीच रास्ते से लौटा; अब पोलैंड में क्यों भड़की हिंसा?

लेखन आबिद खान
Oct 31, 2026
02:09 pm

क्या है खबर?

इटली, फ्रांस समेत कई देशों के बाद अब पोलैंड में हिंसा भड़क गई है। वहां प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और राष्ट्रपति कारोल नवरोकी के बीच सत्ता को लेकर टकराव बढ़ गया है। बीते दिन देश की सबसे बड़ी अदालतों में से शामिल संवैधानिक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके बाद सैकड़ों लोग कोर्ट के बाहर इकट्ठा हो गए। स्थिति बिगड़ती देख भारी संख्या में सुरक्षाबलों को कोर्ट के बाहर तैनात किया गया।

राष्ट्रपति

राष्ट्रपति सेनेगल का दौरा छोड़ लौटे

जब हालात तनावपूर्ण हो रहे थे, तब राष्ट्रपति कारोल सेनेगल जा रहे थे। खबर मिलते ही उन्होंने अपना विमान बीच रास्ते से ही मोड़ लिया और वापस लौट आए।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ऐसे समय में राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है। मैं सेनेगल की अपनी यात्रा बीच में छोड़ रहा हूं। मैं वापस लौट रहा हूं।'

वहीं, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति टस्क पर तख्तापलट करने और संवैधानिक संस्थानों पर कब्जा करने के आरोप लगाए।

तात्कालिक वजह

क्या है हिंसा की तात्कालिक वजह?

दरअसल, संवैधानिक न्यायाधिकरण की जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने न्यायाधिकरण के प्रमुख बोगदान श्विएंत्सकोव्स्की और उपाध्यक्ष बार्टलोमीज सोचान्स्की को निलंबित कर दिया।

अन्ना ने कहा कि अब से ही वे न्यायाधिकरण का कामकाज संभालेंगी। इससे विपक्ष नाराज हो गया और सरकार पर तख्तापलट की कोशिश का आरोप लगाया।

हालांकि, ये केवल तात्कालिक कारण है। न्यायाधिकरण में नियुक्तियों और कामकाज को लेकर विवाद साल 2015 से चल रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच ये टकराव का बड़ा मुद्दा है।

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विवाद

न्यायाधिकरण को लेकर क्या है विवाद?

2015 में दक्षिणपंथी और राष्ट्रीय रूढ़िवादी पार्टी (PiS) सत्ता में आई। उसने न्यायाधिकरण में जजों की नियुक्तियों में तेजी दिखाई, ताकि कोर्ट में उसका बहुमत बन सके।

इसके अलावा जजों की सेवानिवृत्ति उम्र, कोर्ट के प्रमुखों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका और जजों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग व्यवस्था बनाने जैसे कदम भी उठाए थे।

तब टस्क और यूरोपीय संघ (EU) ने इन बदलावों का विरोध किया था।

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सरकार

न्यायाधिकरण में बदलाव को लेकर बढ़ा टकराव

2023 में टस्क की सरकार सत्ता में आई। इसने पिछली सरकार के फैसलों को पलटना चाहा। हालांकि, पोलैंड के राष्ट्रपति रहे आंद्रेज डुडा और मौजूदा राष्ट्रपति कारोल ने वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर टस्क सरकार की कोशिशों को रोक दिया। दोनों PiS के करीबी माने जाते हैं।

टस्क ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति और PiS के करीबी लोग न्यायपालिका में बदलाव की राह रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे कानून का राज बहाल करेंगे।

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