अमेरिकी नागरिकता की लागत में 75 प्रतिशत की बढोतरी का भारतीयों पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
अमेरिका में अपना जीवन बनाने में वर्षों बिताने वाले लाखों प्रवासियों के लिए अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करना हमेशा से एक बड़ा मील का पत्थर माना जाता है। हालांकि, अब इसका रास्ता काफी महंगा होने वाला है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने हाल ही में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने से जुड़े शुल्क में 75-80 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं इस बढ़ोतरी का वहां रहने वाले भारतीयों पर क्या असर होगा।
प्रस्ताव
DHS ने क्या दिया है प्रस्ताव?
DHS ने 22 जून को प्रस्तावित नियम बनाने की सूचना (NPRM) प्रकाशित की थी। इसमें अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करते समय जमा किए जाने वाले फॉर्म N-400 की लागत में 75 से 80 प्रतिशत बढ़ोतरी करने, कम आय वाले आवेदकों के लिए मौजूदा शुल्क रियायतों को हटाने और उन शुल्क माफी को समाप्त करने की भी मांग की गई है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से पात्र आप्रवासियों को नागरिकता प्रक्रिया तक पहुंचने में मदद की है।
सवाल
क्या है फॉर्म N-400?
इस प्रस्ताव के केंद्र में रखा गया फॉर्म N-400 वह दस्तावेज है जिसका उपयोग वैध स्थायी निवासी, जिन्हें आमतौर पर ग्रीन कार्ड धारक के रूप में जाना जाता है, अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए करते हैं। साल 2024 में लागू की गई मौजूदा शुल्क संरचना के तहत कागजी आवेदन करने वाले आवेदकों को 760 डॉलर (लगभग 72,000 रुपये) का भुगतान करना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन आवेदन में 710 डॉलर (लगभग 67,000 रुपये) का भुगतान करना पड़ता है।
प्रस्ताव
DHS ने आवेदन शुल्क में कितनी बढ़ोतरी का दिया प्रस्ताव?
DHS ने अब कागजी या ऑफलाइन आवेदन के लिए इस शुल्क को बढ़ाकर 1,330 डॉलर (लगभग 1.26 लाख रुपये) और ऑनलाइन आवेदन के लिए शुल्क को बढ़ाकर 1,280 डॉलर (लगभग 1.21 लाख रुपये) करने का प्रस्ताव दिया है। इस तरह से ऑफलाइन आवेदन शुल्क में 570 डॉलर (लगभग 54,000 रुपये) की वृद्धि होगी, जो 75 प्रतिशत है। इसी तरह ऑनलाइन आवेदन में भी 570 डॉलर की वृद्धि होगी, जो कि पुराने शुल्क में 80 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्शाती है।
अन्य
फॉर्म N-336 के शुल्क में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव
DHS ने फॉर्म N-336 के माध्यम से नागरिकता अस्वीकृति को चुनौती देने वाले आवेदकों को भी काफी अधिक शुल्क का सामना करना पड़ेगा। यह आधिकारिक तौर पर नागरिकता कार्यवाही में निर्णय पर सुनवाई के लिए अनुरोध के रूप में जाना जाता है। इसमें ऑफलाइन N-336 आवेदनों का शुल्क 830 (लगभग 78,600 रुपये) से बढ़कर 1,475 डॉलर (1.39 लाख रुपये) और ऑनलाइन आवेदन का शुल्क 780 डॉलर (लगभग 74,800 रुपये) से बढ़कर 1,425 डॉलर (1.35 लाख रुपये) करने का प्रस्ताव है।
चिंता
प्रस्ताव से क्यों बढ़ रही चिंता?
इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल मानक फाइलिंग शुल्क में वृद्धि ही नहीं है, बल्कि उन किफायती उपायों को हटाना भी है जिन पर कई अप्रवासी निर्भर रहे हैं। वर्तमान में निर्धारित सीमा से कम पारिवारिक आय वाले कुछ आवेदक कम शुल्क का लाभ उठा सकते हैं। पात्र आवेदक पूरे शुल्क के बजाय 380 डॉलर (लगभग 35,900 रुपये) का भुगतान कर सकते हैं। DHS उस विकल्प को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव दे रहा है।
तर्क
इस प्रस्ताव पर क्या है अमेरिकी सरकार का तर्क?
DHS के अनुसार, प्रस्तावित परिवर्तनों का उद्देश्य नागरिकता प्रणाली में मौजूद महत्वपूर्ण वित्तीय असंतुलन को दूर करना है। यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) मुख्य रूप से आवेदकों के शुल्क से संचालित होता है। वर्तमान दरें नागरिकता आवेदनों की प्रक्रिया की लागतों कवर नहीं कर पाती है। ऐसे में USCIS को नागरिकता प्रक्रिया में हर साल 60 करोड़ डॉलर (लगभग 5,600 करोड़ रुपये) की कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रस्ताव इस अंतर को मिटाने का प्रयास है।
प्रभाव
भारतीय क्यों हो सकते हैं सबसे ज्यादा प्रभावित?
भारत लगातार नए अमेरिकी नागरिकों के मूल देशों में अग्रणी स्थान रखता है और रोजगार-आधारित आप्रवासियों के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बना हुआ है। कई भारतीय नागरिक आव्रजन की विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरने में वर्षों बिता देते हैं। भारतीय नागरिकों को प्रभावित करने वाले ग्रीन कार्ड के व्यापक बैकलॉग के कारण इस प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं। ऐसे में नागरिकता पर्याप्त वित्तीय प्रतिबद्धताओं से जुड़ी एक लंबी प्रक्रिया के बाद का अंतिम चरण है।
जानकारी
अमेरिका में नागरिकता के लिए पात्र हैं 2.90 लाख भारतीय
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 2.90 लाख भारत में जन्मे वैध स्थायी निवासी वर्तमान में अमेरिकी नागरिक बनने के पात्र हैं। ऐसे में DHS का यह प्रस्ताव उनके प्रयासों पर आर्थिक भार बढ़ा सकता है।
बोझ
भारतीय परिवारों को कैसे झेलना पड़ेगा अधिक बोझ?
यह प्रस्ताव भारतीयों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा, क्योंकि अक्सर भारतीय पूरे परिवार के साथ आप्रवासन प्रक्रिया से गुजरते हैं। पति-पत्नी आमतौर पर एक ही समय में नागरिकता के लिए पात्र होते हैं। कई परिवार अपने बुजुर्ग माता-पिता को भी प्रायोजित करते हैं। ऐसे में एक दंपत्ति को अब 1,420 डॉलर (लगभग 1.34 लाख रुपये) की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत अधिक यानी 2,560 डॉलर (लगभग 2.42 लाख रुपये) का भुगतान करना होगा। सदस्य बढ़ने पर शुल्क और बढ़ जाएगा।