
यह बुज़ुर्ग 51 सालों से कर रहा है गाँव की सफाई, छोड़ चुकी हैं दो पत्नियाँ
क्या है खबर?
हर किसी को किसी न किसी चीज़ का जुनून होता है। अपने जुनून को पूरा करने के लिए वो किसी भी हद तक गुज़र सकते हैं।
इस बात को 68 साल के बुजुर्ग ने सही साबित किया है।
दरअसल, बुजुर्ग के ऊपर गाँव की सफाई का ऐसा जुनून चढ़ा कि वह पिछले 51 सालों से गाँव की सफाई कर रहा है। इस वजह से उसकी दो पत्नियों ने उसे छोड़ भी दिया, लेकिन बुजुर्ग का जुनून नहीं थमा।
आइए जानें।
मामला
पिछले 51 सालों से कर रहे हैं सफाई
जानकारी के अनुसार, बिहार के नवादा ज़िले के एक गाँव में 68 वर्षीय किशोरी सिंह पिछले 51 सालों से सफाई कर रहे हैं।
उनके साथ गाँव भर में घूम-घूम कर सफाई करने से तंग आकर उनकी दो पत्नियों ने उन्हें छोड़ भी दिया है।
इसके बाद भी उनके जज़्बे में कोई कमी नहीं आई है और आज भी वो गाँव की हर गलियों और नालियों की साफ-सफाई करते रहते हैं। इस वजह से उन्हें कई लोग पागल भी कहते हैं।
शुरुआत
शादी के समय शुरू किया था अभियान
ख़बरों के अनुसार, वारिसलीगंज नगर पंचायत में पड़ने वाले सांबे निवासी किसान चांदो सिंह के 68 वर्षीय पुत्र किशोरी की शादी के समय आए रिश्तेदारों और भोज की वजह से घर के आगे-पीछे गंदगी फैल गई थी।
जिसे साफ करने के लिए किशोरी ने खुद झाड़ू उठाई थी। आगे चलकर एक दिन का उनका यह काम धीरे-धीरे जुनून में बदल गया। उसके बाद से वो लगातार बिना रुके गाँव की सफाई में जुटे हुए हैं।
जानकारी
सफाई करने के लिए जागते हैं सुबह चार बजे
किशोरी सफाई करने के लिए सुबह चार बजे उठ जाते हैं। एक हाथ में झाड़ू और दूसरे हाथ में तगाड़ी लेकर गाँव की गलियों की सफाई में जुट जाते हैं। सफाई करते समय अगर कोई चाय दे देता है, तो वो पी लेते हैं।
लगन
बिना खाए-पीए शाम को तीन-चार बजे तक करते हैं सफाई
गाँव वाले बताते हैं कि किशोरी रोज़ाना शाम लगभग तीन-चार बजे तक बिना कुछ खाए-पीए गाँव की सफाई करते रहते हैं।
सफाई करने के बाद वो घर जाकर नहा-धोकर ख़ुद ही खाना बनाते हैं और खाते हैं।
इसके अलावा किशोरी सप्ताह में एक दिन मंदिरों और स्कूल की भी सफाई करते हैं।
किशोरी कहते हैं कि पता नहीं क्यों गंदगी देखकर उनसे रहा ही नहीं जाता है।
बयान
किशोरी को पागल कहते हैं लोग
किशोरी बताते हैं कि लगातार सफाई अभियान में जुटे रहने की वजह से गाँव के ज़्यादातर लोग उन्हें पागल कहते हैं। लेकिन गाँव के जो पढ़े-लिखे और सफाई के प्रति जागरूक लोग हैं, वे उनकी तारीफ़ करते हैं।
अन्य मामला
उत्तर प्रदेश में सामने आया था ऐसा ही मामला
इससे पहले उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में एक ऐसे ही व्यक्ति को देखा गया था, जो पिछले 30 सालों से पुलिस थाने में झाड़ू लगा रहा था।
हालाँकि, झाड़ू लगाने के उन्हें पैसे मिलते हैं, लेकिन वो बहुत ही कम हैं।
दरअसल, महेंद्र बाल्मीकी नाम के व्यक्ति को थाने में झाड़ू लगाने के हर महीने केवल 600 रुपये वेतन के तौर पर दिए जाते हैं।
महेंद्र इसी उम्मीद में झाड़ू लगाते हैं कि एक दिन वो सरकारी कर्मचारी बन जाएँगे।