किताबें पढ़ने के लिए अपने नागरिकों को पैसे दे रहा है यह देश, क्या है मकसद?
क्या है खबर?
इस सोशल मीडिया के जमाने में ज्यादातर लोगों ने किताबें पढ़ने की आदत को अलविदा ही कह दिया है। हालांकि, एक ऐसा एशियाई देश है, जो अपने नागरिकों को किताबें पढ़ने के लिए पैसे दे रहा है। हम बात कर रहे हैं सिंगापुर की, जिसने नया किताबें पढ़ने का 5-वर्षीय राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। इसके पीछे एक ही मकसद है, लोगों को किताबें पढ़ने की आदत को अपनाने के लिए प्रेरित करना।
तरीका
क्या है यह अभियान?
इस अभियान में सिंगापुर सरकार किताबें पढ़ने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए छोटी रकम देगी। इसके लिए नागरिकों को सरकार की एक आधिकारिक वेबसाइट पर अपने पढ़ने के समय को दर्ज करना होगा।
यह रणनीति इसलिए अपनाई गई है, ताकि गेमिंग और पॉइंट सिस्टम पसंद करने वाले लोग किताबें पढ़ने की आदत को भी एक मनोरंजक खेल की तरह देखें और अपनाएं।
ऐसा करके सरकार शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट (बिना मतलब के वीडियो) की लत को कम करना चाहती है।
बयान
जनता को समझदार और जिज्ञासु बनाना चाहती है सिंगापुर सरकार
नेशनल लाइब्रेरी बोर्ड की प्रमुख मेलिसा टैम ने एक बयान में कहा, "शॉर्ट-फॉर्म यानि ब्रेनरॉट कंटेंट हमें जानकारी रखने में मदद करता है, लेकिन किताबें पढ़ने से ध्यान लगाने की क्षमता, आलोचनात्मक सोच और कल्पनाशीलता मजबूत होती है।"
उन्होंने आगे कहा, "आखिरकार, हम ऐसे पाठकों का देश देखना चाहते हैं, जो जिज्ञासु, विचारशील और समझदार हों। साथ ही तेजी से जटिल होती दुनिया में आगे बढ़ने के लिए तैयार हों।"
रकम
पढ़ने से कितने पैसे कमा पाएंगे पाठक?
यह अभियान पढ़ने वालों को पैसे तो देगा, लेकिन इसके लिए उन्हें ज्यादा किताबें पढ़नी होंगी। एक सिंगापुरी डॉलर यानि 75 रुपये कमाने के लिए उन्हें 50 दिनों तक पढ़ने की जरूरत होगी।
15 मिनट या उससे ज्यादा देर तक पढ़ने पर लोगों को 20 वर्चुअल सिक्के मिलते हैं। डॉलर में रकम पाने के लिए उन्हें 1,000 सिक्के जमा करने होंगे।
एक दिन में केवल एक ही सेशन रिकॉर्ड किया जा सकता है।
मकसद
क्यों पड़ी इस अभियान की जरूरत?
इस अभियान को ऐसे समय पर शुरू किया गया है, जब लोगों की ध्यान अवधि कम हो चुकी है। इसका कारण शॉर्ट-फॉर्म वीडियो हैं, जिन्हें लोग कुछ सेकंड देखते हैं और फिर बोर हो कर स्क्रॉल कर देते हैं।
इसका असर उनके दिमाग पर हो रहा है और उनका मन पढ़ने, खाने, बाहर जाने, बात करने और काम करने तक में नहीं लग पा रहा है। ऐसे में देखना होगा कि यह अभियान इससे निपटने में कितना कारगर होता है।