सुअर की किडनी से एक व्यक्ति 271 दिनों तक रहा जीवित, अब हुआ इंसानी किडनी प्रत्यारोपण
क्या है खबर?
अमेरिका के न्यू हैम्पशायर में डॉक्टरों ने टिम एंड्रयूज नाम के एक व्यक्ति के शरीर में सुअर की किडनी का प्रत्यारोपण किया था और बिना डायलिसिस के वह 271 दिनों तक जीवित रहे, फिर जनवरी, 2026 में उनका इंसानी किडनी का प्रत्यारोपण किया गया है। 'द लैंसेट'में बीती 3 सितंबर को छपे एक पेपर में मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के फिजिशियन-साइंटिस्ट और उनके साथियों ने एंड्रयूज के अनुभव के बारे में विस्तार से बताया है। आइए जानें।
प्रत्यारोपण
सुअर की किडनी में किए गए थे 69 खास जेनेटिक बदलाव
एंड्रयूज के शरीर में एक युकाटन मिनिएचर सुअर से जीन-एडिटेड किडनी लगाई गई थी। इस सुअर में वायरस के फैलने और इंसानी इंम्यून सिस्टम द्वारा अंग को अस्वीकार किए जाने से बचाने के लिए 69 खास जेनेटिक बदलाव किए गए थे।
सर्जरी के तुरंत बाद ही जेनोट्रांसप्लांट (जानवर से इंसान में अंग प्रत्यारोपण) ने काम करना शुरू कर दिया। 9 महीनों तक एंड्रयूज को डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी और वे रोजमर्रा के काम आसानी से करने लगे।
अंग कार्यक्षमता
6 महीने बाद सुअर की किडनी ने काम करना किया कम
लगभग 6 महीने के बाद एंड्रयूज के शरीर में सुअर की किडनी ने काम करना कम कर दिया, जिसके कारण सूजन जैसी समस्याएं होने लगी। इसके चलते मास जनरल ब्रिघम के सर्जनों ने 9 महीने बाद सुअर की किडनी को हटा दिया।
सर्जनों ने बताया कि ब्लड टेस्ट से पता चला कि सुअर की किडनी ने एंड्रयूज के शरीर में एंटीबॉडी नहीं बनाए, जिससे भविष्य में इंसानी अंग प्रत्यारोपण करने में कोई दिक्कत आती और न ही कोई वायरस फैला।
प्रत्यारोपण
एंड्रयूज को मिली एक मृत डोनर से इंसानी किडनी
कुछ समय तक दोबारा डायलिसिस पर रहने के बाद एंड्रयूज को एक मृत डोनर से इंसानी किडनी मिली, जो अब अच्छे से काम कर रही है।
दुनियाभर में हेल्थ सिस्टम में इंसानी डोनर के अंगों की भारी कमी है, जिसकी वजह से किडनी रोगी सही डोनर का इंतजार करते हुए मुश्किल डायलिसिस प्रोसेस पर निर्भर रहते हैं।
हालांकि, एंड्रयूज के मामले ने भविष्य में अंगदान की जरूरतों को पूरा करने की कोशिशों की तरफ एक उम्मीद की किरण दिखाई है।
अन्य मामला
इंसान में सुअर का दिल लगाने की भी हुई थी विफल कोशिश
एंड्रयूज से पहले NYU लैंगोन ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट की टीम द्वारा किए गए कुछ प्रत्यारोपण कई बार विफल हो चुके हैं।
मार्च, 2022 में 57 वर्षीय डेविड बेनेट आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर का हृदय प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले जीवित इंसान थे। हालांकि, इसके 2 महीने बाद उनकी मृत्यु हो गई थी।
वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि यह सुअर के वायरस का परिणाम हो सकता है। वैज्ञानिक इस गुप्त सुअर वायरस के लिए स्क्रीनिंग कर रहे हैं।