
पुणे: वापस लिया गया महिला वकीलों के कोर्ट में बाल संवारने पर प्रतिबंध लगाने वाला नोटिस
क्या है खबर?
महिला वकीलों के लिए महाराष्ट्र के पुणे की एक कोर्ट का अजीबोगरीब नोटिस सुर्खियों में है।
इस नोटिस में महिला वकीलों को कोर्ट में अपने बाल संवारने से मना किया गया था क्योंकि इससे कोर्ट की कार्रवाई में व्यवधान पड़ता है।
सोशल मीडिया पर महिला वकीलों और आम लोगों के कड़े विरोध के बाद अब इस नोटिस को वापस ले लिया गया है।
आइए जानते हैं कि ये पूरा मामला क्या है।
नोटिस
क्या है पूरा मामला?
पुणे कोर्ट ने 20 अक्टूबर को एक नोटिस जारी किया था।
इसमें महिला वकीलों को कोर्ट में बाल संवारने से मना किया गया था क्योंकि इससे कोर्ट के कामकाज में दखलअंदाजी होती है।
नोटिस में लिखा था, "बार-बार देखा गया है कि महिला वकील अपने बालों को कोर्ट में संवारती या ठीक करती हैं। इससे कोर्ट के कामकाज में दिक्कत हो रही है। इसलिए महिला वकीलों को इस तरह के कृत्य से परहेज करने को कहा जाता है।"
वायरल पोस्ट
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने शेयर की नोटिस की तस्वीर
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने 23 अक्टूबर को अपने ट्विटर अकाउंट पर कोर्ट की तरफ से जारी इस नोटिस की तस्वीर शेयर की।
पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'वाह... देखो! महिला वकीलों की वजह से किसका ध्यान भटक रहा है और क्यों?'
इसके बाद यह पोस्ट वायरल हो गई और करीब 55,000 हजार से ज्यादा लोगों ने इस पोस्ट को लाइक किया। इसके अलावा बहुत से यूजर्स ने कमेंट करके ऐसी सोच पर आपत्ति जताई है।
ट्विटर पोस्ट
देखिए पुणे कोर्ट द्वारा जारी नोटिस की तस्वीर
Wow now look ! Who is distracted by women advocates and why ! pic.twitter.com/XTT4iIcCbx
— Indira Jaising (@IJaising) October 23, 2022
प्रतिक्रिया
यूजर्स ने कोर्ट के नोटिस को बताया बेतुका
पोस्ट देखकर यूजर्स भी कोर्ट के इस आदेश को अजीब बता रहे हैं और अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा, 'यह बिल्कुल बेतुका नोटिस है, जो पितृसत्ता को दर्शाता है।'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'मुझे तो यही नहीं समझ आ रहा कि भला ऐसा करना कोर्ट के कामकाज में कैसे दखल दे सकता है?'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'आमतौर पर पुरुष अपने बाल ठीक करते रहते हैं और हमेशा अपने जेब में एक छोटी कंघी भी रखते।'
नोटिस
विवाद के बाद कोर्ट ने वापस लिया नोटिस
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वकीलों को जारी किए गए सभी नोटिस पुणे बार एसोसिएशन को भेजे जाते हैं, लेकिन कार्यालय को अभी तक ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला है।
ऐसा कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर खराब प्रतिक्रिया मिलने के बाद कोर्ट ने नोटिस वापल ले लिया है।
इंदिरा जयसिंह ने भी आज मामले पर अपडेट देते हुए कहा, 'आखिर में सफलता मिल गई। नोटिस वापस ले लिया गया। आप सभी लोगों को धन्यवाद।'