जानिए कौन हैं 22 साल की तेज गेंदबाज जिंतिमानि कलिता, जिन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू किया
क्या है खबर?
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा तेज गेंदबाज जिंतिमानि कलिता ने वडोदरा में जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया। 22 साल की इस खिलाड़ी को पूर्व भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर के हाथों अपनी पहली इंडिया कैप मिली। अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखने वाली असम की इस क्रिकेटर के लिए यह निश्चित तौर पर गर्व का पल था। आइए उनके अब तक के सफर के बारे में जानते हैं।
मौका
रेणुका सिंह ठाकुर की जगह पर वनडे टीम में शामिल हुई कलिता
भारत की प्रमुख तेज गेंदबाज रेणुका ठाकुर इस वनडे सीरीज से बाहर हो गई और चयन समिति ने कलिता को टीम में शामिल किया।
इसके बाद टीम प्रबंधन ने भरोसा जताते हुए उन्हें डेब्यू का मौका दिया।
कलिता जिम्बाब्वे के खिलाफ हाल ही में संपन्न हुई टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का हिस्सा थी, लेकिन उन्हें किसी भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था।
भारत ने उस टी-20 सीरीज के क्लीन स्वीप किया था।
परिचय
WPL में खेलने वाली असम की पहली क्रिकेटर बनी थी कलिता
क्रिकइंफो के मुताबिक, कलिता का जन्म 25 दिसंबर, 2003 को गुवाहटी में हुआ।
वह घरेलू स्तर पर अपने राज्य असम का प्रतिनिधित्व करती हैं।
उन्होंने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने से पहले, राज्य के घरेलू क्रिकेट सिस्टम में काफी मेहनत की है।
कलिता ने 2023 में इतिहास रचा था, जब वह विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में खेलने वाली असम की पहली महिला क्रिकेटर बनीं थी।
WPL
WPL में अब तक 13 मैच खेल चुकी हैं कलिता
मुंबई इंडियंस (MI) ने WPL की पहली नीलामी में उन्हें 10 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिला।
उन्होंने MI के लिए 2 सीजन में कुल 13 मैच खेले थे।
जनवरी 2026 में, गुजरात जायंट्स ने उन्हें 10 लाख रुपये में इंजरी रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल किया था। हालांकि, उस सीजन में कलिता को गुजरात के लिए खेलने का मौका नहीं मिला।
इंडिया-A
इंडिया-A की टीम से खेलते हुए कलिता ने किया प्रभावित
WPL में कलिता को ज्यादा मौके नहीं मिले और वह इस लीग में अब तक प्रभावित नहीं कर सकी हैं।
कलिता ने सितंबर 2026 में ऑस्ट्रेलिया-A के खिलाफ वनडे और टी-20 सीरीज में हिस्सा लिया था और इससे पहले वह इंडिया-A टीम के साथ इंग्लैंड के दौरे पर भी गई थीं।
इन मौकों से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की टीमों के खिलाफ खेलने का अहम अनुभव मिला, जिससे सीनियर टीम में उनके चुने जाने का रास्ता भी साफ हुआ।