फीफा विश्व कप में खेलने वाले पहले सिख मूल के फुटबॉलर बने सरप्रीत सिंह
क्या है खबर?
भारतीय मूल के फुटबॉलर सरप्रीत सिंह ने फीफा विश्व कप 2026 में इतिहास रच दिया। 27 वर्षीय सरप्रीत टूर्नामेंट में खेलने वाले सिख मूल के पहले खिलाड़ी बन गए। ऑकलैंड में जन्मे इस आक्रामक मिडफील्डर को ईरान के खिलाफ न्यूजीलैंड के पहले मुकाबले में शुरुआती एकादश में शामिल किया गया था। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेला गया यह मैच 2-2 से ड्रॉ रहा। सरप्रीत इससे पहले न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व अंडर-20 फीफा विश्व कप में भी कर चुके हैं।
सफल
पंजाबी परिवार के हैं सरप्रीत के माता-पिता
सरप्रीत के माता-पिता पंजाबी परिवार से हैं। वह भारतीय मूल के सबसे सफल फुटबॉलरों में गिने जाते हैं। उन्होंने 24 मार्च 2018 को कनाडा के खिलाफ फ्रेंडली मैच में न्यूजीलैंड के लिए डेब्यू किया था। उनका पहला अंतरराष्ट्रीय गोल भी भारत में आया था, जब उन्होंने 2018 में मुंबई में आयोजित इंटरकॉन्टिनेंटल कप में केन्या के खिलाफ गोल किया था। इसी टूर्नामेंट में भारत पर न्यूजीलैंड की 2-1 की जीत में उन्होंने दोनों गोल में असिस्ट किया था।
जर्मनी
बुंडेसलीगा में खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी
2019 में सरप्रीत ने इतिहास रचते हुए जर्मनी की बुंडेसलीगा में खेलने वाले भारतीय मूल के पहले फुटबॉलर बने थे। वह A-लीग क्लब वेलिंगटन फीनिक्स से जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख से जुड़े थे। जर्मनी में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्होंने पुर्तगाल के यूनियाओ डी लीरिया के लिए एक सत्र खेला। इसके बाद 2025 में वह सर्बिया के क्लब एफके टीएससी से जुड़े। इसी साल उन्हें सर्बियाई क्लब से लोन पर फिर से वेलिंगटन फीनिक्स भेजा गया।
चोट
विश्व कप से पहले लगी थी चोट
फरवरी में सरप्रीत को मेडियल कोलेटरल लिगामेंट (MCL) की चोट लग गई थी, जिसके कारण वह करीब 8 सप्ताह तक मैदान से बाहर रहे। इस चोट के बाद उनके फीफा विश्व कप में खेलने को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। हालांकि, उन्होंने अप्रैल में वापसी की और शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड की 26 सदस्यीय विश्व कप टीम में जगह बनाई। अब तक सरप्रीत न्यूजीलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में 3 गोल कर चुके हैं।
विश्व कप
सरप्रीत ने कही ये बात
सरप्रीत सिख मूल के पहले फुटबॉलर बनकर इतिहास रच चुके हैं। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, "अपनी संस्कृति और अपने लोगों का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व और बड़ी जिम्मेदारी की बात है। इस उपलब्धि को हासिल करने वाला पहला खिलाड़ी बनना बेहद खास है।" न्यूजीलैंड की टीम 1982 और 2010 के बाद तीसरी बार विश्व कप में खेल रही है। टीम अब टूर्नामेंट का अपना पहला खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी है।