फीफा विश्व कप 2026: मोरक्को के कप्तान अचरफ हकीमी पर बलात्कार का आरोप, चलेगा मुकदमा
क्या है खबर?
मोरक्को फुटबॉल टीम के कप्तान अचरफ हकीमी पर 2023 में एक महिला द्वारा लगाए गए बलात्कार के आरोपों के मामले में अब फ्रांस में मुकदमा चलेगा। फ्रांसीसी अभियोजकों ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि, हकीमी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। स्कॉटलैंड के खिलाफ फीफा विश्व कप 2026 मुकाबले से पहले हकीमी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'न्याय व्यवस्था ने मुझसे कहा कि अगर मैं प्रसिद्ध नहीं होता तो यह मामला कभी नहीं बनता।'
बयान
हकीमी ने और क्या कहा?
हकीमी ने आगे लिखा, 'मैंने सालों तक चुप रहने का फैसला किया। मुझे विश्वास था कि अपनी गरिमा बनाए रखने, धैर्य रखने और न्याय व्यवस्था पर भरोसा करने से सही फैसला आएगा। मेरे परिवार, मेरे जीवन और सबसे बढ़कर सच्चाई की कीमत पर ऐसी कहानी बताई जा रही है जो मेरी नहीं है। मुझे लगता है कि आसान निशाना बन गया हूं। मैं पहले दिन से इस मुकदमे का इंतजार कर रहा था। मुझे अब बात रखने का मौका मिलेगा।"
मुकदमा
पीड़िता के पक्ष ने क्या कहा?
रैचल-फ्लोर पार्डो, जिन्होंने यह मामला दर्ज कराया था ने कहा कि उन्हें राहत है कि पीड़िता की बात न्याय व्यवस्था ने सुनी और उसे मुकदमे का अधिकार मिला। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सुनवाई अन्य महिलाओं को भी आगे आने का हौसला देगी और यौन हिंसा के मामलों, खासकर पुरुष फुटबॉल की दुनिया में इनकार और दंड से बचने की संस्कृति को कमजोर करेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मुकदमा कब शुरू होगा।
वकील
हकीमी के वकील ने कही ये बात
साल 2023 में हकीमी के खिलाफ इस मामले में जांच शुरू हुई थी। उस समय फ्रांसीसी अखबार ले पेरिसियन ने रिपोर्ट की थी कि 24 वर्षीय महिला ने उनपर बलात्कार का आरोप लगाया है। हालांकि, हकीमी की वकील फैनी कोलिन ने कहा कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो उनके मुवक्किल के पक्ष में जाते हैं। उनका दावा है कि किसी अन्य मामले में इतने सबूत मिलने पर कार्यवाही समाप्त कर दी जाती।
न्याय
हकीमी के वकील ने ये बात भी कही
हकीमी की वकील कोलिन ने आगे कहा कि बचाव पक्ष को इस बात का अफसोस है कि शिकायतकर्ता के बयानों में सामने आई कथित गलतियों और बदलते दावों को गंभीरता से नहीं लिया गया। शिकायतकर्ता ने जांच एजेंसियों से कुछ जानकारियां छिपाईं और सच्चाई तक पहुंचने की प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में शिकायतकर्ता के बयानों को लेकर असमंजस और घटना के बारे में स्पष्टता की कमी का जिक्र किया गया है।