अमेरिका-चीन और रूस के बीच क्यों है चांद पर परमाणु बिजलीघर बनाने की होड़?
क्या है खबर?
अमेरिका, चीन और रूस अब चांद पर सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने तक सीमित नहीं रहना चाहते। तीनों देश भविष्य में वहां लंबे समय तक वैज्ञानिक शोध करने और स्थायी ठिकाने बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए लगातार बिजली उपलब्ध कराने वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्र अहम माने जा रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का लक्ष्य 2030 तक चांद की सतह पर परमाणु रिएक्टर बनाना है। चीन और रूस भी इस दिशा में योजनाएं बना रहे हैं।
चुनौती
चांद पर अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहते हैं देश
चांद पर लंबे समय तक मौजूदगी बनाने से देशों को अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी क्षमता बढ़ाने और भविष्य के अभियानों के लिए जरूरी अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा।
वहां वैज्ञानिक शोध, चंद्रमा की सतह का अध्ययन और संभावित संसाधनों की खोज की जा सकती है। अमेरिका और चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों के तहत चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की योजना बना रहे हैं।
रूस भी चीन के साथ मिलकर चंद्र अनुसंधान केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
चुनौती
परमाणु ऊर्जा के बिना मुश्किल होगा लंबे समय तक रहना
चंद्रमा पर दिन और रात का एक पूरा चक्र करीब 29.5 पृथ्वी दिनों का होता है।
कई जगहों पर लगभग दो सप्ताह तक अंधेरा रहता है, जिससे केवल सौर ऊर्जा पर निर्भर रहना मुश्किल हो सकता है। भविष्य में चांद पर ठिकाने बनाए गए, तो वहां रोशनी, गर्मी, संचार और जीवनरक्षक प्रणालियों के लिए लगातार बिजली चाहिए होगी।
परमाणु रिएक्टर सूर्य की रोशनी के बिना भी ऊर्जा पैदा कर सकते हैं और लंबे अभियानों में मददगार हो सकते हैं।
लक्ष्य
नासा का 2030 तक रिएक्टर बनाने का लक्ष्य
नासा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने जनवरी, 2026 में चंद्रमा की सतह के लिए परमाणु ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की साझेदारी आगे बढ़ाई थी।
इसका लक्ष्य 2030 तक रिएक्टर बनाना है। नासा ने 8 अक्टूबर को अंतरिक्ष में परमाणु ऊर्जा और प्रणोदन तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए एक और समझौते की घोषणा की।
एजेंसी 2028 में स्पेस रिएक्टर-1 फ्रीडम मिशन भेजने की भी योजना बना रही है। यह चंद्र सतह पर रिएक्टर बनाने से अलग मिशन होगा।
योजनाएं
चीन और रूस की भी अलग-अलग योजनाएं
चीन 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उतारना चाहता है और रूस के साथ अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान केंद्र विकसित कर रहा है।
रूस की अंतरिक्ष एजेंसी ने 2036 तक चंद्र बिजली संयंत्र बनाने की योजना बताई है, हालांकि, इसकी समयसीमा अभी निश्चित नहीं हैं। दक्षिणी ध्रुव के कुछ अंधेरे गड्ढों में पानी की बर्फ हो सकती है।
परमाणु ऊर्जा वहां उपकरण चलाने में मदद कर सकती है, लेकिन इन योजनाओं की सफलता तकनीक और सुरक्षा पर निर्भर करेगी।