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कौन हैं वैंडी वर्मा, जिनकी अगुवाई में नासा ने मंगल पर पहला AI मिशन पूरा किया?
नासा ने मंगल पर पहला AI मिशन पूरा किया

कौन हैं वैंडी वर्मा, जिनकी अगुवाई में नासा ने मंगल पर पहला AI मिशन पूरा किया?

Feb 04, 2026
06:24 pm

क्या है खबर?

अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पिछले साल के अंत में मंगल ग्रह पर ऑटोनॉमस ड्राइविंग का टेस्ट किया था। इस ऐतिहासिक परीक्षण के केंद्र में भारतीय मूल की रोबोटिक्स इंजीनियर वैंडी वर्मा रहीं। दिसंबर, 2025 में पर्सिवियरेंस रोवर ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से खुद रास्ता चुनकर ड्राइव पूरी की। यह परीक्षण दिखाता है कि भविष्य में रोवर धरती से सीधे निर्देशों के बिना भी सुरक्षित तरीके से मंगल की सतह पर काम कर सकते हैं।

परिचय

कौन हैं वैंडी वर्मा?

वर्मा का जन्म भारत में हुआ और उनकी पढ़ाई-लिखाई भी यहीं से शुरू हुई। उनके पिता भारतीय वायुसेना में थे, जिससे बचपन से ही उन्हें तकनीक और उड़ान की दुनिया देखने को मिली और जिज्ञासा बढ़ी। उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद आगे की पढाई के लिए वह अमेरिका गईं, जहां उन्होंने रोबोटिक्स में उच्च शिक्षा ली और ऑटोनॉमस सिस्टम पर गहराई से काम किया।

भूमिका

नासा में भूमिका और AI ड्राइविंग कैसे हुई?

वर्मा 2007 में नासा की जेट प्रोपल्शन लैब से जुड़ीं और कई मंगल रोवर मिशनों पर काम किया है। मौजूदा टेस्ट में पर्सिवियरेंस रोवर ने कैमरा और सेंसर से इलाके का विश्लेषण किया, जिससे आसपास की पूरी तस्वीर मिली। AI सिस्टम ने चट्टान, ढलान और रेतीले हिस्सों को पहचानकर सुरक्षित रास्ता खुद बनाया। पहले इन रास्तों को कंप्यूटर सिमुलेशन में परखा गया, फिर मंगल पर भेजा गया, जहां रोवर ने सफलतापूर्वक ड्राइव पूरी की।

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अन्य

भविष्य के मिशनों के लिए क्यों है अहम?

नासा का मानना है कि ऑटोनॉमस तकनीक से भविष्य के अंतरिक्ष मिशन ज्यादा तेज़, सुरक्षित और प्रभावी होंगे। जब मिशन पृथ्वी से बहुत दूर होंगे, तब तुरंत निर्देश भेजना मुश्किल हो जाता है और समय की देरी बढ़ती है। ऐसे में AI आधारित सिस्टम रोवर और ड्रोन को खुद फैसले लेने में मदद करेंगे। यह तकनीक चंद्रमा मिशन और मंगल पर इंसानों के भविष्य के मिशनों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

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