जल्द ही यहां लगाई जा सकती है सफेद ट्रैफिक लाइट, जानिए वजह
क्या है खबर?
अमेरिका में जल्द ही सड़कों पर दिखने वाली ट्रैफिक लाइट में नया रंग जुड़ सकता है। अब लाल, पीली और हरी लाइट के साथ सफेद लाइट की टेस्टिंग शुरू की जा रही है। यह बदलाव बढ़ती सेल्फ-ड्राइविंग गाड़ियों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में ऑटोनॉमस गाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, ऐसे में मौजूदा ट्रैफिक सिस्टम में बदलाव जरूरी हो जाएगा, ताकि ट्रैफिक ज्यादा सुरक्षित और सुचारु रूप से चल सके।
वजह
क्यों जरूरी मानी जा रही है सफेद ट्रैफिक लाइट?
सफेद ट्रैफिक लाइट खासतौर पर सेल्फ-ड्राइविंग गाड़ियों के लिए बनाई गई है। यह लाइट ऑटोनॉमस गाड़ियों से सीधे संपर्क कर उन्हें बताएगी कि चौराहे से गुजरना सुरक्षित है या नहीं। इसे 'फॉलो द लीडर' सिग्नल कहा जा रहा है। इसका मतलब है कि गाड़ियां एक-दूसरे और ट्रैफिक सिस्टम से तालमेल बनाकर आगे बढ़ेंगी, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या घटेगी, भीड़ कम होगी और हादसों की संभावना भी घटेगी, साथ ही यात्रा ज्यादा सुचारु और नियंत्रित हो सकेगी।
ट्रायल
नॉर्थ कैरोलिना में होगा सफेद लाइट का ट्रायल
सफेद ट्रैफिक लाइट का पहला ट्रायल अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में किया जाएगा। यह कॉन्सेप्ट वहीं की एक यूनिवर्सिटी में तैयार किया गया था। इस लाइट को हरी लाइट के नीचे लगाया जाएगा। जब यह एक्टिव होगी, तो मैन्युअल ड्राइव करने वाले लोगों को बस आगे चल रही कार को फॉलो करना होगा। ट्रायल में देखा जाएगा कि इससे ट्रैफिक फ्लो कितना बेहतर होता है और समय की कितनी बचत होती है।
भविष्य
भविष्य की तैयारी है यह नई ट्रैफिक तकनीक
जानकारों का कहना है कि सफेद लाइट से यात्रा का समय करीब 10 प्रतिशत तक कम हो सकता है और ईंधन की खपत भी घटेगी। हालांकि, इसे बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सड़कों पर 30 से 40 प्रतिशत गाड़ियों का ऑटोनॉमस होना जरूरी है। ऐसा अभी तुरंत संभव नहीं है। इसलिए सफेद ट्रैफिक लाइट को भविष्य की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले दशकों में ट्रैफिक सिस्टम को पूरी तरह बदल सकती है।