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नासा के क्रू-12 मिशन में कौन-कौन अंतरिक्ष यात्री हैं शामिल?
सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नई तारीख तय की गई है (तस्वीर: नासा)

नासा के क्रू-12 मिशन में कौन-कौन अंतरिक्ष यात्री हैं शामिल?

Feb 12, 2026
01:00 pm

क्या है खबर?

अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने अहम अंतरिक्ष मिशन क्रू-12 को लॉन्च करने जा रही है। भारतीय समय के अनुसार यह मिशन कल (12 फरवरी) शाम 3:45 बजे स्पेस-X के फाल्कन 9 रॉकेट से रवाना होगा। पहले खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण लॉन्च टालना पड़ा था। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नई तारीख तय की गई है। इसमें शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री फिलहाल विशेष क्वारंटाइन में रहकर पूरी सावधानी के साथ अंतिम तैयारियां कर रहे हैं।

जेसिका मीर

जेसिका मीर के नेतृत्व में उड़ान भरेगा दल

क्रू-12 मिशन की कमान नासा की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर संभालेंगी। यह उनका दूसरा अंतरिक्ष मिशन है और वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर करीब 200 से अधिक दिन बिता चुकी हैं। उन्होंने स्पेसवॉक में भी हिस्सा लिया है और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों का नेतृत्व किया है। उनके अनुभव को इस मिशन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। टीम की कमान उनके मजबूत नेतृत्व में होगी।

जैक और सोफी

जैक हैथवे और सोफी एडेनोट की अहम भूमिका

इस मिशन में पायलट के रूप में जैक हैथवे शामिल हैं, जो पहली बार अंतरिक्ष यात्रा पर जा रहे हैं। वह अमेरिकी नौसेना में कमांडर रह चुके हैं और 30 से अधिक प्रकार के विमानों में 2,500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव रखते हैं। वहीं यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) की सोफी एडेनोट भी टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने वायुसेना में सेवा दी है और कठिन परिस्थितियों में उड़ान भरने का अनुभव हासिल किया है।

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आंद्रे फेड्याएव

रूस के आंद्रे फेड्याएव भी टीम में शामिल

क्रू-12 मिशन में रूस के कॉस्मोनॉट आंद्रे फेड्याएव भी शामिल हैं। वे पहले भी स्पेस-X के एक मिशन के जरिए ISS जा चुके हैं और अंतरिक्ष में काम करने का अनुभव रखते हैं। उनकी मौजूदगी मिशन को और मजबूत बनाती है। इस तरह अमेरिका, यूरोप और रूस के चार विशेषज्ञ एक साथ मिलकर काम करेंगे। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा वैज्ञानिक प्रयासों का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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अध्ययन

8 महीने तक करेंगे वैज्ञानिक अध्ययन

चारों अंतरिक्ष यात्री ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट "फ्रीडम" के जरिए ISS पहुंचेंगे और वहां करीब 8 महीने तक रहेंगे। यह सामान्य अवधि से अधिक समय है। मिशन के दौरान वे माइक्रोग्रैविटी में रक्त प्रवाह, बैक्टीरिया के प्रभाव और पौधों की वृद्धि पर शोध करेंगे। चंद्रमा पर भविष्य की लैंडिंग के लिए विशेष अभ्यास भी किए जाएंगे। इन प्रयोगों से अंतरिक्ष में मानव जीवन की समझ बढ़ेगी और पृथ्वी पर चिकित्सा व कृषि क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिल सकता है।

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