पृथ्वी पर कहां गिर सकता है नासा का स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप? जानिए इसकी बड़ी उपलब्धियां
क्या है खबर?
नासा का स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप जल्द ही पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। करीब 2 दशक तक ब्रह्मांड की रहस्यमयी घटनाओं का अध्ययन करने वाला यह टेलीस्कोप अब अपनी कक्षा में ऊंचाई बनाए रखने में सक्षम नहीं है। इसे बचाने के लिए भेजा गया निजी रोबोटिक मिशन भी सफल नहीं हो सका। ऐसे में यह बिना नियंत्रण के धरती की ओर लौटेगा। हालांकि, इसके गिरने से जमीन पर किसी बड़े नुकसान की आशंका कम बताई जा रही है।
लॉन्च
2004 में लॉन्च हुआ था स्विफ्ट टेलीस्कोप
नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को नवंबर, 2004 में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था।
करीब 1,500 किलोग्राम वजनी इस टेलीस्कोप में 3 अलग-अलग उपकरण लगाए गए थे। इनमें बर्स्ट अलर्ट टेलीस्कोप, एक्स-रे टेलीस्कोप और अल्ट्रावॉयलेट-ऑप्टिकल टेलीस्कोप शामिल हैं।
इनकी मदद से यह अंतरिक्ष में होने वाले गामा-रे विस्फोट, एक्स-रे और दूसरी घटनाओं का अध्ययन करता था। 20 अक्टूबर को नासा ने बताया कि इसकी कक्षा की ऊंचाई घटकर 275 किलोमीटर रह गई है।
जगह
पृथ्वी पर कहां गिर सकता है स्विफ्ट?
अभी यह तय नहीं है कि स्विफ्ट टेलीस्कोप 6 नवंबर को किस जगह पृथ्वी पर गिरेगा।
हालांकि, इसकी कक्षा भूमध्य रेखा के आसपास 21 डिग्री के दायरे में फैली है। इस क्षेत्र में समुद्र का बड़ा हिस्सा आता है, लेकिन अफ्रीका, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा लैटिन अमेरिका के कुछ आबादी वाले इलाके भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वायुमंडल में प्रवेश करते समय इसका ज्यादातर हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा और कुछ टुकड़े ही बच सकते हैं।
अध्ययन
ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली धमाकों का किया अध्ययन
स्विफ्ट टेलीस्कोप की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गामा-रे विस्फोटों का अध्ययन शामिल है।
ये ब्रह्मांड में होने वाले बेहद शक्तिशाली धमाके हैं, जिनसे बहुत कम समय में भारी ऊर्जा निकलती है। इसके 3 उपकरणों ने इन घटनाओं को अलग-अलग तरंगों में देखने में मदद की। इससे वैज्ञानिकों को विस्फोट के तुरंत बाद की स्थिति समझने और उनके स्रोतों का पता लगाने में मदद मिली।
स्विफ्ट ने ऐसे कई धमाकों की पहचान कर उनके बारे में अहम जानकारी जुटाई।
अन्य
अंतरिक्ष की घटनाओं पर रखी नजर
स्विफ्ट ने केवल गामा-रे विस्फोटों तक ही अपना काम सीमित नहीं रखा। इसने ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारों और दूसरी चमकदार खगोलीय घटनाओं का भी अध्ययन किया।
इसके एक्स-रे और अल्ट्रावॉयलेट उपकरणों ने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में बदलती गतिविधियों को समझने में मदद की। इस टेलीस्कोप से मिले आंकड़े दुनियाभर के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी रहे हैं।
अब इसका मिशन खत्म होने की ओर है, लेकिन इससे जुटाई गई जानकारी लंबे समय तक वैज्ञानिकों के काम आएगी।