लद्दाख में लगने वाले हैं भारत के दो बड़े टेलीस्कोप, क्या होगी इनकी खासियत?
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने इस साल के बजट में लद्दाख में दो बड़े टेलीस्कोप लगाने और एक पुराने टेलीस्कोप को अपग्रेड करने की मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का उद्देश्य सूरज और ब्रह्मांड की गहराई से वैज्ञानिक अध्ययन करना है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खगोल विज्ञान के क्षेत्र में मजबूत पहचान मिलेगी और देश की शोध क्षमता में बड़ा विस्तार होगा।
जगह
लद्दाख में बनेंगे उन्नत वेधशाला केंद्र
ये दोनों नए टेलीस्कोप लद्दाख के हानले और पैंगोंग त्सो झील के पास मेराक क्षेत्र में लगाए जाएंगे। हानले समुद्र तल से करीब 4,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां साफ, सूखा और ठंडा मौसम मिलता है। यह भारत का पहला डार्क स्काई रिजर्व भी है। कम रोशनी और साफ आसमान के कारण यहां से तारों और ग्रहों का अवलोकन बहुत स्पष्ट तरीके से किया जा सकता है।
सोलर टेलीस्कोप
2 मीटर का नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप
नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) का अपर्चर 2 मीटर होगा। यह सूरज की सतह, सौर धब्बों, सौर विस्फोट और चुंबकीय गतिविधियों का अध्ययन करेगा। यह दृश्य और निकट अवरक्त तरंगदैर्घ्य में काम करेगा। इससे अंतरिक्ष मौसम की बेहतर समझ विकसित होगी, जो सैटेलाइट, संचार और बिजली ग्रिड पर असर डाल सकता है। इसके बनने में लगभग पांच से छह साल लग सकते हैं और यह भारत की तीसरी ग्राउंड-बेस्ड सोलर वेधशाला होगी।
ऑप्टिकल टेलीस्कोप
13.7 मीटर का विशाल ऑप्टिकल टेलीस्कोप
दूसरा टेलीस्कोप नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इंफ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT) होगा, जिसका मुख्य दर्पण 13.7 मीटर चौड़ा होगा। यह एक सेगमेंटेड मिरर टेलीस्कोप होगा, जिसमें 90 छोटे हेक्सागोनल दर्पण मिलकर एक बड़े दर्पण की तरह काम करेंगे और सटीक अलाइनमेंट सिस्टम से जुड़े होंगे। यह ऑप्टिकल और इंफ्रारेड तरंगदैर्घ्य में काम करेगा। इससे दूरस्थ आकाशगंगाओं, एक्सोप्लैनेट, तारों के जन्म, ब्लैक होल और सुपरनोवा जैसी घटनाओं का गहराई से और अधिक सटीक अध्ययन संभव होगा।
अपग्रेड
हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप का अपग्रेड
सरकार ने 2 मीटर हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप (HCT) को भी अपग्रेड करने की मंजूरी दी है। इसे 3.7 मीटर के सेगमेंटेड प्राइमरी मिरर में बदला जाएगा, जिससे इसकी प्रकाश संग्रह क्षमता पहले से काफी बढ़ जाएगी। इससे इसकी रोशनी इकट्ठा करने की क्षमता बढ़ेगी और अधिक स्पष्ट, विस्तृत और उच्च गुणवत्ता वाले चित्र मिलेंगे। यह टेलीस्कोप ट्रांजिएंट खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करेगा और LIGO-इंडिया जैसी परियोजनाओं के साथ मिलकर काम करेगा। इससे भारत की अंतरिक्ष शोध क्षमता और मजबूत होगी।