नासा का नया नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप मिशन के दौरान क्या खोजेगा?
क्या है खबर?
नासा ने अपनी नई अंतरिक्ष वेधशाला नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया है। इसे फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस-X के फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। अब रोमन करीब 16 लाख किलोमीटर दूर उस क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, जहां से वह ब्रह्मांड का बड़े स्तर पर अध्ययन करेगा। टेलीस्कोप का मकसद अंतरिक्ष के कई बड़े रहस्यों को समझना और नई खोज करना है।
डार्क एनर्जी
डार्क एनर्जी और डार्क मैटर पर नजर
रोमन के सबसे बड़े लक्ष्यों में डार्क एनर्जी और डार्क मैटर को समझना शामिल है।
वैज्ञानिक अभी इन दोनों के बारे में पूरी तरह नहीं जानते हैं। रोमन आसमान के बड़े हिस्से का सर्वे करके यह पता लगाने में मदद करेगा कि डार्क एनर्जी ब्रह्मांड के फैलाव को किस तरह प्रभावित करती है।
इसके साथ ही, डार्क मैटर के असर को भी समझने की कोशिश होगी। इससे ब्रह्मांड की संरचना और उसके विकास की बेहतर जानकारी मिल सकती है।
नए ग्रह
सौरमंडल के बाहर नए ग्रह खोजेगा
रोमन हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद एक्सोप्लैनेट की भी तलाश करेगा।
इसके कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट की मदद से वैज्ञानिक दूसरे तारों के आसपास घूम रहे कमजोर ग्रहों को सीधे देखने की कोशिश करेंगे। यह उपकरण चमकीले तारों की रोशनी को कम करने में मदद करेगा, जिससे उनके आसपास मौजूद ग्रह दिखाई दे सकें।
वैज्ञानिक इन ग्रहों और उनके वातावरण का अध्ययन कर सकेंगे। इससे भविष्य में पृथ्वी जैसे ग्रहों और वहां जीवन की संभावनाओं की खोज को मदद मिल सकती है।
आकाशगंगा
अरबों आकाशगंगाओं का करेगा सर्वे
रोमन का वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट आसमान के बहुत बड़े हिस्से को एक साथ देखने में सक्षम होगा।
नासा के अनुसार, यह हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में बहुत तेज गति से ब्रह्मांड का सर्वे करने के लिए तैयार किया गया है। मिशन के दौरान यह अरबों आकाशगंगाओं का अध्ययन कर सकता है।
इससे वैज्ञानिकों को आकाशगंगाओं के बनने और उनके समय के साथ बदलने की जानकारी मिलेगी। रोमन बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड का नया नक्शा तैयार करने में मदद करेगा।
अन्य
आइंस्टीन के सिद्धांत की भी होगी जांच
रोमन की मदद से वैज्ञानिक गुरुत्वाकर्षण को बड़े स्तर पर भी जांचेंगे।
दूर मौजूद वस्तुओं की रोशनी जब किसी विशाल वस्तु के पास से गुजरती है, तो उसका रास्ता मुड़ सकता है। वैज्ञानिक इस प्रभाव का अध्ययन करके यह जांचेंगे कि ब्रह्मांड के बड़े पैमाने पर आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण संबंधी सिद्धांत कितने सही हैं।
रोमन का मुख्य मिशन करीब पांच साल का होगा और इसे दस साल तक काम करने के लिए तैयार किया गया है।