क्या है AI रोबोट मोंक 'बुद्धरॉइड' की खासियत, जिसे जापान में किया गया पेश?
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग शिक्षा और स्वास्थ्य के बाद अब आध्यात्मिक के क्षेत्र में भी होने लगा है। जापान में एक रिसर्च ग्रुप ने AI से लैस 'बुद्धरॉइड' नाम का रोबोट मोंक पेश किया है। इसे क्योटो यूनिवर्सिटी ने टेक कंपनियों टेरावर्स और XNOVA के साथ मिलकर विकसित किया है। इस पहल को क्योटो के शोरेन-इन मंदिर में औपचारिक रूप से पेश किया गया, जहां इसे आगंतुकों से संवाद के लिए तैयार किया गया है।
वजह
क्यों तैयार किया गया यह रोबोट?
जापान में घटती आबादी और उम्र बढ़ने की समस्या के कारण बौद्ध मंदिरों में पादरियों की संख्या कम होती जा रही है। युवा पीढ़ी में धार्मिक भागीदारी भी घट रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2040 तक करीब 30 प्रतिशत मंदिर बंद हो सकते हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में यह और अधिक होगा। ऐसे हालात में यह रोबोट मंदिरों की गतिविधियों को बनाए रखने और आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
खासियत
क्या है बुद्धरॉइड की खासियत?
बुद्धरॉइड को इंसानी मोंक की तरह आध्यात्मिक सलाह देने और लोगों की व्यक्तिगत चिंताओं को समझने के लिए डिजाइन किया गया है। यह जेनरेटिव AI मॉडल पर आधारित है, जिसे बौद्ध धर्मग्रंथों और पारंपरिक शिक्षाओं से प्रशिक्षित किया गया है। यह आगंतुकों के सवालों का रियल-टाइम और संदर्भ के अनुसार जवाब दे सकता है। इसके हार्डवेयर में झुकना, हाथ जोड़ना और गाशो जैसे पारंपरिक इशारे करने की क्षमता भी है, जिससे यह मंदिर परंपराओं के अनुरूप स्वाभाविक व्यवहार करता है।
तकनीक
तकनीक और परंपरा का संगम
जापान में धार्मिक स्थलों पर रोबोट का इस्तेमाल नया नहीं है, लेकिन बुद्धरॉइड को सीधी, संवादात्मक और इंटरैक्टिव बातचीत के लिए खास तौर पर बनाया गया है। डेवलपर्स का मानना है कि एक भौतिक रोबोटिक रूप केवल स्क्रीन आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म की तुलना में ज्यादा भरोसा, अपनापन और जुड़ाव पैदा करता है। इस पहल से पारंपरिक रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखने, युवा पीढ़ी को जोड़ने और आधुनिक तकनीक के साथ आध्यात्मिक अनुभव को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई गई है।