Loading...
क्या है नासा का PRIMA मिशन? 2033 में लॉन्च करने की है तैयारी
नासा ने PRIMA को 2033 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है

क्या है नासा का PRIMA मिशन? 2033 में लॉन्च करने की है तैयारी

Sep 24, 2026
06:45 pm

क्या है खबर?

नासा ने अपने नए प्रोब एक्सप्लोरर्स कार्यक्रम के पहले मिशन के लिए PRIMA स्पेस टेलीस्कोप को चुना है। एजेंसी ने 23 सितंबर को इसकी जानकारी दी है। यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष में दूर मौजूद ग्रहों, तारों, गैलेक्सी और ब्लैक होल के बारे में जानकारी जुटाएगा। इसका मकसद यह समझना है कि ये चीजें कैसे बनीं और समय के साथ इनमें किस तरह बदलाव आया। नासा ने PRIMA को 2033 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है।

काम

खास तरह की रोशनी से करेगा काम

PRIMA की खासियत यह है कि यह फार-इंफ्रारेड रोशनी में अंतरिक्ष को देखेगा।

इस रोशनी की मदद से उन जगहों की जानकारी मिल सकती है, जिन्हें सामान्य रोशनी में देखना मुश्किल होता है। अंतरिक्ष में मौजूद ठंडी गैस और धूल से जुड़ी जानकारी भी इससे मिल सकेगी।

यही गैस और धूल कई जगहों पर नए तारों और ग्रहों के बनने में अहम भूमिका निभाती है। टेलीस्कोप में 1.8 मीटर का आईना होगा।

प्रक्रिया

ग्रह बनने की प्रक्रिया का पता लगाएगा

PRIMA यह समझने में मदद करेगा कि हमारे सोलर सिस्टम के बाहर दूसरे ग्रह किस तरह बनते हैं।

वैज्ञानिक उन इलाकों का अध्ययन करेंगे जहां ग्रह बनने की प्रक्रिया चल रही होती है। इन जगहों पर मौजूद ठंडी गैस और धूल के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि नए ग्रहों के लिए जरूरी सामग्री कहां से आती है।

इससे ग्रहों की शुरुआती स्थिति और उनके बनने की प्रक्रिया पता चलेगी।

ADVERTISEMENT

गैलेक्सी

गैलेक्सी और ब्लैक होल की भी जांच

PRIMA का काम सिर्फ ग्रहों तक सीमित नहीं रहेगा। यह टेलीस्कोप गैलेक्सी और उनके बीच मौजूद ब्लैक होल के बारे में भी जानकारी जुटाएगा।

वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि अरबों साल में गैलेक्सी और ब्लैक होल किस तरह बड़े हुए। इसके साथ ही अंतरिक्ष में मौजूद धूल और भारी तत्वों के बारे में भी अध्ययन किया जाएगा।

इस जानकारी से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि यूनिवर्स आज जैसा है, वह कैसे बना।

ADVERTISEMENT

लॉन्च

2033 में हो सकता है लॉन्च

नासा ने PRIMA को 2033 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए पांच साल का मिशन तय किया गया है।

यह मिशन शुरुआती डिजाइन और तकनीक तैयार करने वाले चरण में पहुंच गया है। इसकी प्रोजेक्ट लागत 1.2 अरब डॉलर तक रखने की योजना है। इसमें लॉन्च का खर्च शामिल नहीं है।

दक्षिणी कैलिफोर्निया की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी मिशन संभालेगी। फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा, जापान और दूसरे देश भी इसमें सहयोग करेंगे।

ADVERTISEMENT