स्मार्टफोन में क्या होती है IP रेटिंग? जानिए IP67, IP68 और IP69 में फर्क
क्या है खबर?
आजकल स्मार्टफोन IP67, IP68 और IP69 जैसे IP रेटिंग के साथ आते हैं। यह रेटिंग बताती है कि कोई डिवाइस धूल और पानी से कितना सुरक्षित है। कंपनियां अब डिवाइस को ज्यादा मजबूत बना रही हैं, इसलिए खरीदारों के लिए इन रेटिंग को समझना जरूरी हो गया है। सही जानकारी होने से लोग अपने इस्तेमाल के हिसाब से टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला डिवाइस आसानी से चुन सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं।
IP रेटिंग
IP रेटिंग का मतलब क्या होता है?
IP का मतलब इनग्रेस प्रोटेक्शन होता है, जो एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जिसमें दो अंक होते हैं। इसका पहला अंक धूल से सुरक्षा दिखाता है, जो 0 से 6 तक होता है। 6 का मतलब पूरी तरह धूल से सुरक्षित। दूसरा अंक पानी से सुरक्षा बताता है, जो 0 से 9 तक होता है। यह नंबर जितना बड़ा होगा, उतनी ज्यादा सुरक्षा मानी जाती है और डिवाइस ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और भरोसेमंद माना जाता है।
वॉटरप्रूफ
क्या IP डिवाइस पूरी तरह वॉटरप्रूफ हैं?
IP रेटिंग का मतलब यह नहीं है कि डिवाइस पूरी तरह पानी में खराब नहीं होगा। यह टेस्ट लैब में साफ पानी से किए जाते हैं। असली जिंदगी में खारा पानी, साबुन या दूसरे तरल पदार्थ नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक पानी में रहने या बार बार भीगने से भी सुरक्षा कम हो सकती है। इसलिए यूजर्स को इसे पूरी गारंटी नहीं, बल्कि एक सामान्य दिशा के रूप में समझना चाहिए और हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए।
अंतर
IP67, IP68 और IP69 में क्या फर्क है?
IP68 रेटिंग वाले फोन पूरी तरह धूल से सुरक्षित होते हैं और लगभग 1.5 मीटर पानी में 30 मिनट तक रह सकते हैं। IP67 में भी धूल से सुरक्षा मिलती है, लेकिन पानी में सुरक्षा थोड़ी कम होती है, लगभग 1 मीटर तक। IP69 सबसे मजबूत माना जाता है, जो तेज दबाव और गर्म पानी के जेट को भी झेल सकता है। यह आमतौर पर मजबूत, औद्योगिक और कठिन परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस में देखा जाता है।
महत्व
यूजर्स के लिए IP रेटिंग का महत्व
IP रेटिंग यूजर्स को यह समझने में मदद करती है कि उनका डिवाइस रोजमर्रा के हालात में कैसा काम करेगा। जैसे बारिश, धूल या पानी गिरने पर डिवाइस कितना सुरक्षित रहेगा। यह पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, लेकिन अलग अलग डिवाइस की तुलना करने में मदद करती है। सही IP रेटिंग वाला डिवाइस चुनने से फोन की उम्र बढ़ती है, भरोसा बढ़ता है और खराब होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।