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क्या है इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर, जिसे WHO ने माना है एक बीमारी?
यह मानसिक दबाव पैदा करता है

क्या है इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर, जिसे WHO ने माना है एक बीमारी?

Feb 04, 2026
06:10 pm

क्या है खबर?

आज मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम बच्चों व किशोरों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, दोस्ती और मनोरंजन अब काफी हद तक स्क्रीन तक सीमित होता जा रहा है। जब डिजिटल इस्तेमाल संतुलन से बाहर चला जाता है, तो यह मानसिक दबाव पैदा करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक अत्यधिक ऑनलाइन जुड़ाव बच्चों के व्यवहार, भावनाओं और सोचने की क्षमता पर गहरा असर डाल सकता है।

IGD

इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर (IGD) को आधिकारिक तौर पर एक मानसिक बीमारी के रूप में मान्यता दी है। WHO के अनुसार, इसमें व्यक्ति गेम खेलने पर नियंत्रण खो देता है और खेल को पढ़ाई, परिवार व रोजमर्रा की गतिविधियों से ऊपर रखने लगता है। नुकसान होने के बावजूद गेमिंग जारी रहती है। यह केवल आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक स्थिति है, जिसे इलाज और समझ की जरूरत होती है।

प्रभाव

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

WHO और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या से घबराहट, अवसाद, चिड़चिड़ापन और अकेलापन बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इस बीमारी से प्रभावित प्रभावित बच्चे धीरे-धीरे परिवार और दोस्तों से कटने लगते हैं। शारीरिक रूप से आंखों में दर्द, सिरदर्द, नींद न आना और शरीर में थकान आम लक्षण हैं। पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में गिरावट भी दिखने लगती है, जिसे कई बार लोग सही समय पर पहचान नहीं हैं।

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जरूरत

जागरूकता और रोकथाम क्यों जरूरी?

WHO लगातार डिजिटल लत को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर देता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन समय पर ध्यान देना चाहिए और उनसे खुलकर बातचीत करनी चाहिए। सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से भी उम्र आधारित सुरक्षा नियम लागू करने की मांग की जा रही है। समय रहते पहचान, सही मार्गदर्शन और सहयोग से इस मानसिक समस्या को गंभीर संकट बनने से रोका जा सकता है।

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