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क्या है गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर? अंतरिक्ष में AI चिप्स का होगा पहला टेस्ट
अंतरिक्ष में AI का परीक्षण करेगी गूगल

क्या है गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर? अंतरिक्ष में AI चिप्स का होगा पहला टेस्ट

Sep 25, 2026
09:02 am

क्या है खबर?

गूगल अपने प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग का परीक्षण शुरू करने जा रही है। इसके लिए एक सैटेलाइट स्पेस-X राइडशेयर मिशन से लो-अर्थ ऑर्बिट में भेजा जाएगा। इसमें गूगल की टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (TPU) चिप्स लगाई जाएंगी। कंपनी पता लगाना चाहती है कि ये चिप्स अंतरिक्ष के रेडिएशन, गर्मी, ठंड और तेज कंपन जैसे हालात में कैसे काम करती हैं। इसे अंतरिक्ष आधारित AI सिस्टम की जांच माना जा रहा है।

योजना

अंतरिक्ष में AI सिस्टम बनाने की योजना

प्रोजेक्ट सनकैचर का उद्देश्य समझना है कि क्या भविष्य में अंतरिक्ष में बड़े AI कंप्यूटिंग सिस्टम बनाए जा सकते हैं।

लो-अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट सूरज से सोलर पावर बना सकते हैं। गूगल आगे सैटेलाइट जोड़कर AI काम करने वाले नेटवर्क की संभावना देख रहा है।

हालांकि, अभी कंपनी का पहला लक्ष्य हार्डवेयर को अंतरिक्ष में सुरक्षित चलाना और उससे जानकारी हासिल करना है। इस परीक्षण से आगे की तकनीक बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

जांच

रेडिएशन में चिप्स की होगी जांच

इस मिशन में TPU चिप्स पर परीक्षण किए जाएंगे।

रॉकेट लॉन्च के दौरान तेज कंपन और दबाव पड़ता है, इसलिए जमीन पर ऐसे हालात में हार्डवेयर जांचा गया है। अंतरिक्ष का रेडिएशन चिप्स को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लिए गूगल ने क्रोकर लैब में प्रोटॉन बीम से TPU चिप्स का परीक्षण किया।

टीम यह भी देखेगी कि रेडिएशन से होने वाली बिट फ्लिप जैसी गलतियों का असर AI काम पर कितना पड़ता है।

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चुनौती

चिप्स को ठंडा रखना बड़ी चुनौती

अंतरिक्ष में चिप्स को ठंडा रखना भी बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वहां सामान्य हवा नहीं होती।

गूगल इसके लिए हीट पाइप और रेडिएटर वाली नई कूलिंग तकनीक का परीक्षण करेगा। आगे के सैटेलाइट में कई TPU चिप्स लगाकर उन्हें आपस में जोड़ा जाएगा।

इन सैटेलाइट को तेज जानकारी भेजने के लिए लेजर कम्युनिकेशन का इस्तेमाल करना होगा। गूगल इस तकनीक से जुड़े दो सैटेलाइट का परीक्षण 2027 में करने की योजना है।

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नेटवर्क

आगे बन सकता है बड़ा नेटवर्क

गूगल के मुताबिक, यह मिशन अंतरिक्ष में AI डाटा सेंटर की दिशा में शुरुआती कदम है।

कंपनी यह जानना चाहती है कि हार्डवेयर लगातार काम कर सकता है और कहां सुधार जरूरी है। भविष्य में दर्जनों TPU वाली सैटेलाइट क्लस्टर बनाने की योजना पर काम हो सकता है। काफी बड़े स्तर पर ऐसा नेटवर्क बनाना आसान नहीं होगा।

इसके लिए रेडिएशन, कूलिंग, बिजली और सैटेलाइट कनेक्शन जैसी समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी होगा।

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