क्या है गूगल का क्लाउड फ्रॉड डिफेंस सिस्टम? जानिए कैसे करेगा काम
क्या है खबर?
इंटरनेट पर बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और नकली ट्रैफिक को रोकने के लिए गूगल ने नया सुरक्षा सिस्टम शुरू किया है। कंपनी अब पुराने कैप्चा सिस्टम को धीरे-धीरे बदल रही है। इसकी जगह अब नया क्लाउड फ्रॉड डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल किया जा रहा है। गूगल का कहना है कि इससे वेबसाइट की सुरक्षा मजबूत होगी और असली यूजर्स को कम परेशानी होगी। यह फीचर कुछ वेबसाइट पर शुरू भी हो चुका है और आगे इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है।
सिस्टम
क्या है गूगल का नया सिस्टम?
गूगल क्लाउड फ्रॉड डिफेंस एक ऐसा सिस्टम है, जो वेबसाइट पर आने वाली संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करता है। अगर सिस्टम को किसी यूज़र की गतिविधि पर शक होता है, तो स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड दिखाया जाता है। इसके बाद यूजर को अपने एंड्रॉयड फोन से उसे स्कैन करना होता है। यह तरीका पुराने इमेज वाले टेस्ट से अलग है। कंपनी का कहना है कि इससे फर्जी अकाउंट और ऑटोमेटेड बॉट्स को रोकने में ज्यादा मदद मिलेगी।
काम
इस तरह करेगा काम
नए सिस्टम में यूज़र को गूगल प्ले सर्विस वाले एंड्रॉयड फोन की जरूरत होगी। QR कोड स्कैन होने के बाद सिस्टम फोन की विश्वसनीयता की जांच करेगा। अगर डिवाइस सुरक्षित और सही पाया जाता है, तभी वेबसाइट तक पहुंच मिलेगी। पहले जहां तस्वीरें चुनकर साबित करना पड़ता था कि यूजर इंसान है, अब डिवाइस की पहचान के जरिए यह काम होगा। इससे फर्जी गतिविधियां पकड़ना आसान होगा और लोगों को बार-बार मुश्किल टेस्ट हल नहीं करने पड़ेंगे।
प्राइवेसी
प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल
इस नए सिस्टम को लेकर कई लोगों ने चिंता भी जताई है। खासकर वे यूजर्स जो ऐसे एंड्रॉयड सिस्टम इस्तेमाल करते हैं, जिनमें गूगल की सेवाएं नहीं होतीं। ऐसे लोगों को वेबसाइट इस्तेमाल करने में दिक्कत आ सकती है। कुछ डेवलपर्स और प्राइवेसी समर्थकों का कहना है कि इससे लोगों की ऑनलाइन आजादी पर असर पड़ेगा। हालांकि, गूगल का दावा है कि यूजर्स का डाटा सुरक्षित रहेगा। आने वाले समय में इस तकनीक को लेकर चर्चा और बढ़ सकती है।