क्या है एंथ्रोपिक का 'क्लाउड कोड सिक्योरिटी' AI टूल, जिससे साइबर सुरक्षा कंपनियों में मची हलचल?
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी एंथ्रोपिक ने एक नया AI टूल पेश किया है, जिसके कारण शेयर बाजार में साइबर सुरक्षा से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। कंपनी के "क्लाउड कोड सिक्योरिटी" नामक टूल की घोषणा के बाद कई बड़ी साइबर फर्मों के शेयर एक ही दिन में तेजी से टूट गए। इस खबर से निवेशकों में चिंता बढ़ी और सेक्टर की कंपनियों के बाजार मूल्य में अरबों डॉलर की कमी दर्ज की गई।
टूल
क्या है क्लाउड कोड सिक्योरिटी टूल?
क्लाउड कोड सिक्योरिटी एक ऐसा AI टूल है, जो सॉफ्टवेयर के कोड में छिपी सुरक्षा कमजोरियों को खोजने में मदद करता है। कंपनी के अनुसार यह टूल उन खामियों को भी पहचान सकता है, जो पारंपरिक सुरक्षा सिस्टम अक्सर पकड़ नहीं पाते हैं। यह कोड को स्कैन करके संभावित खतरे बताता है और फिर उन्हें ठीक करने के लिए सटीक सॉफ्टवेयर पैच का सुझाव देता है, जिसे इंसान बाद में रिव्यू कर सकते हैं।
काम
कैसे करता है यह टूल काम?
यह टूल पारंपरिक स्टैटिक एनालिसिस सिस्टम से अलग तरीके से काम करता है। जहां पुराने टूल तय पैटर्न के आधार पर कोड मिलाते हैं, वहीं क्लाउड कोड सिक्योरिटी कोड को इंसानी शोधकर्ता की तरह पढ़कर समझने की कोशिश करता है। यह डाटा फ्लो को ट्रेस करता है, अलग-अलग सॉफ्टवेयर हिस्सों के बीच संबंध को समझता है और जटिल कमजोरियों की पहचान करता है। इसके बाद AI आधारित जांच प्रक्रिया गलत अलर्ट को फिल्टर करती है।
वजह
क्यों गिरे साइबर कंपनियों के शेयर?
इस टूल की लॉन्चिंग के बाद निवेशकों को यह डर सताने लगा है कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा कंपनियों की सेवाओं की मांग भविष्य में घट सकती है। अगर AI खुद ही कोड की खामियां तेजी से ढूंढने और उन्हें सुधारने लगेगा, तो कई मौजूदा सिक्योरिटी प्रोडक्ट्स और सर्विस की जरूरत कम हो सकती है। इसी आशंका के चलते कई बड़ी कंपनियों के शेयर 8 से 9 प्रतिशत तक गिर गए और बाजार में तेज व व्यापक बिकवाली देखने को मिली।
फायदा
किसे मिलेगा इस टूल का फायदा?
एंथ्रोपिक ने बताया है कि फिलहाल यह टूल एंटरप्राइज और बड़ी टीम ग्राहकों के लिए सीमित रिसर्च प्रीव्यू के रूप में उपलब्ध कराया गया है। कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इसे आम यूजर्स या छोटे डेवलपर्स के लिए कब जारी किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक की मदद से सैकड़ों गंभीर और जटिल कमजोरियां खोजी गई हैं, जिनमें से कई लंबे समय तक इंसानी जांच और पारंपरिक ऑडिट से भी छूट गई थीं।