ISRO को हर साल 50 रॉकेट लॉन्च करने के लिए क्या करना होगा बदलाव? जानिए चुनौतियां
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2030 तक हर साल 50 रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है। यह मौजूदा लॉन्च संख्या के मुकाबले बड़ा लक्ष्य है। 21 सितंबर तक 2026 में भारत ने सिर्फ तीन ऑर्बिटल लॉन्च किए थे। इनमें दो लॉन्च ISRO ने और एक निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने किया था। ऐसे में 50 लॉन्च तक पहुंचने के लिए देश को रॉकेट बनाने, जांचने और लॉन्च करने की क्षमता बढ़ानी होगी।
रॉकेट
रॉकेट तैयार करना बड़ी चुनौती
इस लक्ष्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती रॉकेट तैयार करने की क्षमता बढ़ाना है।
हर साल 50 लॉन्च के लिए रॉकेट अलग-अलग चरणों में तैयार रखने होंगे। एक स्थिर व्यवस्था के लिए करीब 10 से 15 लॉन्च व्हीकल एक साथ निर्माण, जांच और लॉन्च की तैयारी में हो सकते हैं।
इसके लिए कंपनियों, पुर्जे बनाने वाले सप्लायर, टेस्टिंग सेंटर और ईंधन से जुड़ी सुविधाओं की जरूरत होगी। सैटेलाइट तैयार करने की क्षमता भी बढ़ानी होगी।
लॉन्च पैड
लॉन्च पैड बढ़ाना भी जरूरी
लॉन्च पैड की संख्या बढ़ाना भी बड़ी चुनौती है।
अभी श्रीहरिकोटा भारत का मुख्य ऑर्बिटल लॉन्च केंद्र है और वहां तीसरे लॉन्च पैड को मंजूरी मिल चुकी है। तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में छोटे रॉकेटों के लिए एक नया लॉन्च परिसर भी बनाया जा रहा है।
अगर भारत हर साल दर्जनों मिशन चलाना चाहता है, तो आगे और लॉन्च सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। इससे अलग-अलग रॉकेटों को समय पर लॉन्च करना आसान होगा।
भागीदारी
निजी कंपनियों की बढ़ेगी भूमिका
निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना भी जरूरी होगा।
स्काईरूट एयरोस्पेस और अग्निकुल कॉसमॉस जैसी कंपनियां अपने रॉकेट तैयार कर रही हैं। इससे ISRO के मिशन के अलावा देश को अतिरिक्त लॉन्च क्षमता मिल सकती है।
ISRO दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट और अगली पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल पर भी काम कर रहा है। हालांकि, ज्यादा लॉन्च के लिए निजी कंपनियों, भरोसेमंद सप्लायर और प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना बहुत जरूरी होगा।
अन्य
पूरे अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ाना होगा
भारत का 50 लॉन्च का लक्ष्य केवल ज्यादा रॉकेट बनाने से पूरा नहीं होगा।
इसके लिए सैटेलाइट उपलब्ध कराने, रॉकेट निर्माण तेज करने और लॉन्च से पहले जांच की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की जरूरत होगी। ISRO और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर निजी कंपनियों को भी इस व्यवस्था में बड़ी भूमिका देना चाहते हैं।
आने वाले समय में भारत के लिए रॉकेट, लॉन्च पैड और अंतरिक्ष उद्योग की क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।