भारत में डिजिटल धोखाधड़ी वैश्विक औसत से दोगुनी
ट्रांसयूनियन की H1 2026 'टॉप फ्रोड ट्रेंड्स रिपोर्ट' के अनुसार, भारत में 2025 में डिजिटल धोखाधड़ी की दर 7.1 फीसदी तक पहुंच गई, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है।
जहां दुनियाभर में ज्यादातर धोखाधड़ी नए खाते बनाते समय होती है, वहीं भारत में ऐसी धोखाधड़ी अकाउंट लॉग-इन करते समय ज्यादा देखने को मिलती है। नए खाते खोलना और वित्तीय लेन-देन भी धोखेबाजों के निशाने पर अक्सर रहते हैं।
सबसे ज्यादा इस क्षेत्र में हुई धोखाधड़ी
पिछले साल डिजिटल धोखाधड़ी से सबसे ज्यादा लॉजिस्टिक्स सेक्टर प्रभावित हुआ, जहां 16.3 फीसदी धोखाधड़ी दर्ज की गई। इसके बाद टेलीकॉम (14.7 फीसदी) और इंश्योरेंस (11.5 फीसदी) सेक्टर का नंबर रहा।
ट्रांसयूनियन इंडिया ने बताया कि इन क्षेत्रों में अक्सर रियल-टाइम इंटरेक्शन, डिस्ट्रीब्यूटेड नेटवर्क और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रांजैक्शन होते हैं। धोखेबाजों को इससे पहचान सत्यापन और प्रमाणीकरण की कमियों का फायदा उठाने का मौका मिल जाता है।
ट्रांसयूनियन इंडिया डाटा एनालिटिक्स सॉल्यूशंस (INDAS) के फ्रोड सॉल्यूशंस प्रमुख अनुराग आनंद ने कहा, "धोखेबाज अब ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं।" रिपोर्ट में कंपनियों से अनुरोध किया गया है कि वे एडाप्टिव ऑथेंटिकेशन और एडवांस्ड एनालिटिक्स जैसे स्मार्ट टूल्स का उपयोग करें।
इसकी वजह यह है कि धोखेबाज पुराने सिक्योरिटी सिस्टम को चकमा देने के लिए नए-नए तरीके खोज रहे हैं, खासकर नए अकाउंट बनाते समय और लॉग-इन के दौरान।