अवैध वन्यजीव व्यापार रोकने के लिए दिग्गज कंपनियां AI का करेंगी इस्तेमाल
तकनीक, वित्त और यात्रा जैसे बड़े क्षेत्रों की नामी कंपनियां एक साथ आगे आई हैं, ताकि 23 अरब डॉलर (करीब 2,100 अरब रुपये) के अवैध वन्यजीव व्यापार पर लगाम लगाई जा सके।
यह व्यापार 10 लाख से ज्यादा प्रजातियों के लिए खतरा बना हुआ है। यह संकल्प प्रिंस विलियम और रॉयल फाउंडेशन के 'यूनाइटेड फोर वाइल्डलाइफ' द्वारा लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान आयोजित एक बिजनेस फोरम में लिया गया।
यह साफ दिखाता है कि कंपनियां पर्यावरण के साथ-साथ अपने व्यापारिक हितों को भी ध्यान में रख रही हैं।
अभियान में ये कंपनियां निभा रहीं भागीदारी
गूगल, मेटा, टिक-टॉक और अलीबाबा जैसी कंपनियां ऑनलाइन अवैध वन्यजीवों की लिस्टिंग को पहचानने और उन्हें हटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बना रही हैं। वोडाफोन और उसके साथी एम-पेसा पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले टूल्स को AI की मदद से और मजबूत कर रहे हैं। दूसरी ओर, पेपाल और ब्लॉकचेन कंपनियां इस अवैध व्यापार को बढ़ावा देने वाले वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं।
ब्रिटिश एयरवेज और हीथ्रो एयरपोर्ट मिलकर यात्रियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए एक जन जागरूकता अभियान भी शुरू कर रहे हैं।
यूनाइटेड फोर वाइल्डलाइफ के सह अध्यक्ष डेविड फेन ने इस बारे में कहा, "आज हम निजी क्षेत्र में देख रहे हैं कि कंपनियां इस बात को स्वीकार कर रही हैं कि अवैध वन्यजीव व्यापार सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि व्यवसाय से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा भी है।"