डाटा साझा करने से भारत में AI को मिलेगी रफ्तार, अरबों रुपये भी बचेंगे
टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट कहती है कि भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आगे बढ़ाने का सपना बेहतर डाटा साझाकरण पर टिका है।
स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सरकारी विभागों के डाटा को आपस में जोड़कर देश अपनी डिजिटल सेवाओं को काफी बेहतर बना सकता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत के सालाना कल्याणकारी खर्च का 4 से 7 फीसदी हिस्सा डाटा लीक होने की वजह से बेकार चला जाता है, लेकिन इन रिकॉर्ड्स को दुरुस्त करने से पहले ही अरबों रुपये बच चुके हैं।
राज्य डाटा बैलेंस शीट जैसे कदम सुझाए
AI का लाभ सभी तक पहुंचाने के लिए रिपोर्ट डाटा को संभालने के लिए कुछ सामान्य नियम बनाने, उसकी नियमित जांच करने और उसे स्टोर करने के लिए एक साझा सिस्टम बनाने का सुझाव देती है।
इसके अलावा, यह कानूनी सुरक्षा और स्टेट डाटा बैलेंस शीट जैसी प्रणाली से डाटा संपत्तियों पर नजर रखने की सलाह भी देती है। कर्नाटक की कुटुम्बा सोशल रजिस्ट्री और राजस्थान का पहचान पोर्टल जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि डाटा का समझदारी से इस्तेमाल करके सार्वजनिक सेवाओं को कितना बेहतर बनाया जा सकता है।
अगर, ऐसे ही तरीकों को पूरे देश में लागू किया जाए तो भारत अपने बड़े AI लक्ष्यों को और तेजी से हासिल कर पाएगा।