दिल्ली हिंसा: पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन दंगा भड़काने का दोषी करार, 12 अन्य आरोपी बरी
क्या है खबर?
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में दंगा भड़काने, उकसाने और आगजनी करने का दोषी करार दिया है। हालांकि, अदालत ने पुख्ता सबूतों के अभाव में अन्य 12 सह-आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले में अंतिम बहस 16 नवंबर को होगी।
धारा
किन धाराओं के तहत ठहराया दोषी?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर को दंगा करने, घातक हथियारों से लैस होने और गैर-कानूनी रूप से जमाव के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148 और 149, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए धारा 427, आग या विस्फोटक पदार्थ से घर और दुकानों को नुकसान पहुंचाने के लिए धारा धारा 436 के तहत दोषी ठहराया है।
इसी तरह कोर्ट ने उन्हें पूरे प्रकरण में आपराधिक साजिश रचने के लिए धारा 120B के तहत दोषी ठहराया है।
परेशानी
ताहिर को दूसरी बार ठहराया गया दोषी
यह ताहिर की कानूनी मामलों में दूसरी बड़ी दोषसिद्धि है। इससे पहले 31 जुलाई, 2026 को इसी अदालत ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की दंगों के दौरान बर्बरतापूर्वक हत्या करने के मामले में ताहिर और 4 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
ताहिर ने अंकित हत्याकांड में मिली उम्रकैद की सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ अगस्त 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां उनकी याचिका फिलहाल लंबित है।
पृष्ठभूमि
ताहिर के खिलाफ क्या है पूरा मामला?
यह मामला दयालपुर पुलिस थाने में दर्ज FIR संख्या 120/2020 से संबंधित है।
शिकायतकर्ता इरशाद अली का आरोप था कि दंगों के दौरान उपद्रवियों ने उनकी दुकान में लूटपाट कर उसे आग के हवाले कर दिया था।
दूसरे शिकायतकर्ता मोहम्मद जाहिद ने बताया कि दंगाई भीड़ ताहिर के नाम के नारे लगा रही थी और चिल्ला रही थी कि वे सब ताहिर के साथ हैं। जांच के दौरान क्षेत्र में तैनात 2 पुलिस कांस्टेबलों ने ताहिर की पहचान की थी।
दंगा
क्या है 2020 का दिल्ली दंगा?
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे।
तभी 24 फरवरी, 2020 को सांप्रदायिक झड़पें शुरू हो गई, जिनमें कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 700 लोग घायल हो गए।
हिंसा के दौरान दुकानों और वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई, जिससे कारोबारियों और स्थानीय लोगों का बड़ा नुकसान हुआ। इसी को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं।