भारत का अत्याधुनिक रिएक्टर हुआ क्रिटिकल, जानिए इसके क्या हैं मायने
तमिलनाडु में भारत का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) आधिकारिक तौर पर क्रिटिकल हो गया है। इसका मतलब है कि अब यह अपनी न्यूक्लियर चेन रिएक्शन खुद ही शुरू कर सकता है। भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। PFBR को इस तरह से बनाया गया है कि यह सीमित यूरेनियम का बेहतर इस्तेमाल कर सके और देश की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम कर सके।
PFBR करता है प्लूटोनियम और सोडियम कूलेंट का इस्तेमाल
PFBR प्लूटोनियम को ईंधन के तौर पर उपयोग करता है। इसका खास डिजाइन, जिसमें लिक्विड सोडियम कूलेंट का इस्तेमाल होता है, इसे ऐसी क्षमता देता है कि यह जितना ईंधन खर्च करता है, उससे कहीं ज्यादा नया ईंधन बना लेता है। भारत के पास दुनिया के लगभग एक-चौथाई थोरियम के भंडार मौजूद हैं। इन रिएक्टरों में भविष्य में इन भंडारों को और भी ज्यादा न्यूक्लियर ईंधन में बदला जा सकेगा। भारत का लक्ष्य 2047 तक न्यूक्लियर ऊर्जा को बढ़ाना है और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन (नेट जीरो एमिशन) तक पहुंचना है। ऐसे में, यह रिएक्टर आने वाले सैकड़ों सालों तक भारत को बिजली उपलब्ध करा सकता है।