भारत के फार्मा-बायोटेक पेटेंट नियमों में बड़ा बदलाव
भारत के पेटेंट कार्यालय ने फार्मा और बायोटेक पेटेंट की जांच-परख को ज्यादा स्पष्ट और एक जैसा बनाने के लिए ड्राफ्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
देश दुनिया में दवाओं का एक बड़ा केंद्र है, ऐसे में ये बदलाव नई दवाओं और इलाज के तरीकों को मिलने वाली पेटेंट सुरक्षा का भविष्य तय कर सकते हैं।
नवीनता और नैतिकता के मानक तय किए
इन ड्राफ्ट दिशा-निर्देशों का मकसद पेटेंट अधिकारियों द्वारा आवेदनों की समीक्षा प्रक्रिया को एक समान बनाना है। इसके लिए अदालतों द्वारा तय किए गए फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे निष्पक्षता बनी रहे। साथ ही, जीन डायग्नोस्टिक्स, स्टेम सेल्स और फार्म जानवरों की क्लोनिंग जैसे मुश्किल और जटिल क्षेत्रों पर भी खास ध्यान दिया गया है।
इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसे 'नया' माना जाएगा और क्या नैतिक रूप से सही होगा। कानूनी विशेषज्ञ मोहित सिंह का मानना है कि इससे पूरे सिस्टम पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा और भारत के बायफार्मा सेक्टर में शोध और को बढ़ावा मिलेगा।