कॉन्क्लेव में AI से स्वास्थ्य सेवा में आने वाले बदलावों पर हुआ मंथन
इस सप्ताह वाराणसी में एक कॉन्क्लेव आयोजित किया गया था। इसका आयोजन इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (BHU) वाराणसी के सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) ने मिलकर किया।
इसमें गहनता से विचार किया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव कैसे ला सकता है। इस कॉन्क्लेव का मुख्य जोर बीमारियों की पहचान, चिकित्सा निदान और दूरस्थ निगरानी के लिए AI के उपयोग पर था। इसका सीधा मकसद उन लोगों और दूरदराज के समुदायों तक स्वास्थ्य सेवा को सुलभ और किफायती बनाना है, जहां मेडिकल सुविधाओं की सीमित पहुंच है।
उपयोगी AI समाधान बनाने पर जोर
इस कार्यक्रम में सरकारी अधिकारी, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, शिक्षाविद और स्टार्टअप्स एक साथ आए। यहां सभी ने मिलकर AI के ऐसे समाधानों पर विचार-मंथन किया, जिनका असल दुनिया में उपयोग किया जा सके।
STPI के महानिदेशक अरविंद कुमार ने बताया कि भारत को सूचना प्रौद्योगिकी और IT-इनेबल्ड सर्विसेज उद्योग विकसित करने का जो अनुभव मिला है, वह स्वदेशी AI नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में काफी मददगार हो सकता है।
IIT BHU के निदेशक अमित पात्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाना और अन्वेषक (इनोवेटर्स) को फंडिंग के स्रोतों से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। इन्हीं प्रयासों से अच्छे आइडिया को वास्तविक प्रभाव में बदला जा सकता है।