स्टारलिंक ने भारत के लिए पूरी तैयारी की, अब बस सरकार की अंतिम मंजूरी बाकी
क्या है खबर?
स्पेस-X की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी सेवा शुरू करने के करीब पहुंच गई है। कंपनी की वरिष्ठ अधिकारी लॉरेन ड्रेयर ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में बताया कि भारत के लिए स्टारलिंक का पूरा सिस्टम यहां के सुरक्षा नियमों और सरकारी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी भारतीय ग्राहकों का डाटा देश में ही रखने की तैयारी कर चुकी है। हालांकि, व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए अभी अंतिम सरकारी मंजूरी मिलना बाकी है।
बातचीत
सरकार के साथ लगातार बातचीत
स्टारलिंक पिछले करीब 5 साल से भारत में अपनी सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
इस दौरान कंपनी ने सरकारी विभागों, दूरसंचार कंपनियों और दूसरे संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत की है। कंपनी का कहना है कि इस बातचीत से उसे भारत की जरूरतों और नियमों को समझने में मदद मिली।
स्टारलिंक के साथ वनवेब और जियो सैटेलाइट को भी सेवा के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं। फिर भी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
वजह
सुरक्षा बनी सबसे बड़ी वजह
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा से जुड़ी मंजूरियां हैं।
सरकार चाहती है कि देश में काम करने वाले सैटेलाइट नेटवर्क पर जरूरी नियंत्रण भारत के पास रहे। इसी बीच दूरसंचार विभाग ने ऐसी कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम इस्तेमाल का शुल्क तय किया है।
सामान्य तौर पर यह शुल्क समायोजित सकल राजस्व का पांच प्रतिशत होगा। मुश्किल इलाकों में सेवा देने वाली कंपनियों को इसमें एक प्रतिशत तक राहत मिल सकती है।
अन्य
दूरदराज इलाकों पर नजर
स्टारलिंक ने भारत में सेवा शुरू करने के लिए अपना जमीनी ढांचा भी तैयार कर लिया है।
कंपनी के मुताबिक, देश में 20 गेटवे साइट्स बनाई जा चुकी हैं, जहां सैकड़ों एंटेना लगाए गए हैं। स्टारलिंक का कहना है कि भारत में इंटरनेट तेजी से बढ़ा है, लेकिन गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और दूसरे दूरदराज इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना अब भी चुनौती है।
कंपनी मंजूरी मिलते ही ऐसे क्षेत्रों में सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी में है।