स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने टाइप 1 डायबिटीज का चूहों में किया सफल इलाज
स्टैनफोर्ड के शोधकर्ताओं ने चूहों में टाइप 1 मधुमेह (डायबिटीज) का इलाज करने में सफलता पाई है। इसके लिए उन्होंने ब्लड स्टेम सेल और पैंक्रियाटिक सेल दोनों का ट्रांसप्लांट किया।
साथ ही, उन्होंने चूहों को कम खुराक वाली रेडिएशन और प्रतिरक्षा प्रणाली को लक्षित करने वाली कुछ दवाओं से एक हल्का शुरुआती उपचार भी दिया।
इस तरीके से चूहों के शरीर में एक ऐसी मिली-जुली प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो गई, जिसने शरीर को इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को स्वीकार करना सिखा दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि चूहों को फिर इंसुलिन के इंजेक्शन की आवश्यकता नहीं रही।
इंसानाें में परीक्षण के बीच आ रहा रोड़ा
यह महत्वपूर्ण खोज सिर्फ डायबिटीज के लिए ही नहीं, बल्कि ल्यूपस या रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए भी सुरक्षित और ज्यादा प्रभावी इलाज का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
यह नई प्रक्रिया गंभीर दुष्प्रभाव से बचती है, लेकिन चूहों से इंसानों तक इसे ले जाना मुश्किल है। इसकी वजह डोनर की कमी और इसे बड़े पैमाने पर तैयार करने की चुनौतियां हैं। फिर भी, यह भविष्य में और बेहतर उपचार मिलने का एक आशाजनक संकेत है।