बुढ़ापे में भी याददाश्त नहीं होगी कमजोर, वैज्ञानिकों ने खोजी प्रोटीन
वैज्ञानिकों ने हाल ही में मेनिन नाम की एक प्रोटीन की खोज की है, जिसकी हमारे बुढ़ापे की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका हो सकती है। चूहों पर हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने देखा कि जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती है, उनके हाइपोथैलेमस में मेनिन प्रोटीन का स्तर घटने लगता है। इस कमी के कारण याददाश्त कमजोर होना, दिमाग में सूजन आना, त्वचा पतली होना, हड्डियां कमजोर पड़ना और जीवनकाल का छोटा होना जैसी कई दिक्कतें सामने आती हैं।
हालांकि, जब वैज्ञानिकों ने चूहों में मेनिन प्रोटीन का स्तर बढ़ाया तो उम्र से जुड़ी इन समस्याओं में काफी सुधार देखने को मिला। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये नतीजे काफी उम्मीद जगाने वाले हैं।
डी-सेरीन को बढ़ाने में सहायक
मेनिन प्रोटीन, डी-सेरीन नाम के अमीनो एसिड को बनाने में भी खास भूमिका निभाता है। सीखने और याददाश्त के लिए यह डी-सेरीन बहुत जरूरी माना जाता है।
अगर, इस प्रोटीन का स्तर कम हो जाए तो डी-सेरीन का स्तर भी घट जाता है। इससे दिमाग की कोशिकाएं आपस में ठीक से संवाद नहीं कर पातीं, जिसका सीधा असर याददाश्त पर पड़ता है।
डी-सेरीन सोयाबीन और अंडे जैसी चीजों में मिलता है, जो दिमाग को तेज बनाए रखने के लिए जरूरी है। यह शोध बताता है कि मेनिन प्रोटीन का सही स्तर बनाए रखना बुढ़ापे में याददाश्त और सोचने की क्षमता को कम होने से बचाने के लिए बेहद अहम हो सकता है।