AI के बढ़ते खर्चे पर लगाम लगाने के लिए कंपनियां अपना रहीं ओपन-सोर्स और मिनी मॉडल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) महंगा होता जा रहा है और अब कंपनियां इसके इस्तेमाल को लेकर नए सिरे से सोचने लगी हैं। वो दौर खत्म हो रहा है, जब निवेशक सिर्फ यूजर्स जोड़ने के लिए AI पर पानी की तरह पैसा बहाते थे।
इसकी एक वजह यह भी है कि OpenAI और एंथ्रोपिक जैसे बड़े नाम भी इस साल अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी में हैं।
हार्डवेयर की कमी और लगातार बढ़ते खर्चों के कारण अब कंपनियां AI को अपने काम में लेने के लिए ऐसे तरीके खोज रही हैं, जो स्मार्ट भी हों और सस्ते भी।
मिनी मॉडल इस्तेमाल से लागत हुई कम
लागत कम करने के लिए कई कंपनियां अब मुफ्त ओपन-सोर्स AI टूल्स इस्तेमाल कर रही हैं। कुछ तो फाइनेंस या रियल एस्टेट जैसे खास सेक्टर्स के लिए बने छोटे AI मॉडल्स पर काम कर रही हैं।
कुछ कंपनियां तो अपने काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देती हैं, ताकि हर हिस्से के लिए कम खर्चीले मॉडल का उपयोग किया जा सके। एनवर्सो के एड्रियन बालफोर बताते हैं कि मिनी मॉडल्स का इस्तेमाल करके लागत को 15 डॉलर (करीब 1,400 रुपये) से घटाकर सिर्फ 5 सेंट (करीब 14.5 रुपये) प्रति 10 लाख टोकन तक लाया जा सकता है। यह AI के प्रदर्शन और किफायतीपन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।