रेड बैलून एयरोस्पेस देगी अंतरिक्ष तकनीकों को टेस्ट करने की सुविधा
निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष कंपनी रेड बैलून एयरोस्पेस इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रही है। यह रॉकेट की बजाय ऊंचाई पर उड़ने वाले गुब्बारों से अंतरिक्ष के उपकरणों का परीक्षण कर रही है।
पिछले महीने यह भारत की पहली निजी कंपनी बन गई, जिसने एक सुपर-प्रेशर बैलून लॉन्च किया। इसके साथ ही, यह अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों के उस खास क्लब में शामिल हो गई है।
ये गुब्बारे धरती से 20 से 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ते हैं। इनकी मदद से किसी भी तकनीक को सीधे अंतरिक्ष में भेजने से पहले कम लागत में टेस्ट किया जा सकता है।
गगनयान के लिए एक नया टेस्ट प्लेटफॉर्म
रेड बैलून ने 3 मुख्य प्लेटफॉर्म- बनाए हैं। इनमें लंबी उड़ानों के लिए विस्टा, निगरानी और संचार के लिए एल्टिस और दोबारा इस्तेमाल होने वाला एयरशिप हेलिक्स शामिल है, जो सुरक्षित तरीके से नीचे उतर सकता है।
यह तकनीक भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के क्रू कैप्सूल को असल परिस्थितियों में परखने में सहायक हो सकती है। इसके साथ ही, आपदा प्रबंधन या जमीन की बारीक तस्वीरें लेने जैसी सेवाएं भी ये प्लेटफॉर्म पुराने सिस्टम से कहीं ज्यादा तेजी और स्पष्टता से मुहैया करा सकते हैं।
इनका लक्ष्य यूनिवर्सिटी और स्टार्टअप के लिए 'नियर-स्पेस' रिसर्च को किफायती बनाना भी है, जिससे अंतरिक्ष की सीमाओं को समझने में रुचि रखने वालों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।