भारतीय विशेषज्ञ ने AI का फायदा सभी देशों को मिलने पर दिया जोर
पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर एक ग्लोबल डायलॉग शुरू किया था। इसमें सभी देशों को शामिल होने का न्योता दिया गया है, ताकि इसके फायदे हर किसी तक पहुंच सकें।
इस पहल को सही दिशा देने के लिए 40 विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई है। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल AI के प्रमुख प्रोफेसर बी रविंद्रन भी शामिल हैं, जो इस पैनल में इकलौते भारतीय हैं। ये सभी विशेषज्ञ अपनी वैज्ञानिक जानकारी साझा करेंगे।
प्रोफेसर रविंद्रन का कहना है कि अगर, AI के लिए अलग-अलग देशों के कानून बिखरे हुए रहे तो यह इसके विकास को रोक सकता है और देशों के बीच की खाई को और गहरा कर सकता है।
वे कहते हैं, "इसीलिए, अतरराष्ट्रीय समझौते और इंतजाम बहुत जरूरी हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जो देश खुद AI नहीं बना रहे, उनके हितों की भी रक्षा हो और वे भी AI की तरक्की से लगातार फायदा उठाते रहें।"
भारत करेगा ट्रस्टेड AI कॉमंस की मेजबानी
भारत 'ट्रस्टेड AI कॉमंस' की मेजबानी करने की तैयारी में है। यह एक खुला और सबके लिए सुलभ प्लेटफॉर्म होगा। यह जिम्मेदार AI के विकास के लिए टूल्स, डाटासेट्स और प्रोटोकॉल्स का एक साझा मंच बनेगा।
इसका मकसद इन संसाधनों को पूरी दुनिया में उपलब्ध कराना है, ताकि देश अकेले काम करने के बजाय मिलकर काम कर सकें और AI में तरक्की कर सकें।