फाइजर की फेफड़ों के कैंसर की दवा ट्रायल में हुई नाकाम
फाइजर की नई फेफड़ों के कैंसर की दवा सिग्वोताटुग वेडोटिन अपने एक बड़े और अहम क्लीनिकल ट्रायल में मरीजों का जीवनकाल बढ़ाने में सफल नहीं हो पाई है।
यह दवा उन मरीजों पर जांची जा रही थी, जिनका कैंसर काफी बढ़ चुका था और जिनमें 'इंटीग्रिन बीटा-6' नाम का एक खास प्रोटीन था।
यह प्रोटीन अक्सर ऐसे कैंसरों में पाया जाता है और इलाज को और भी मुश्किल बना देता है। इस दवा ने पारंपरिक इलाज डॉसेटेक्सेल से बेहतर नतीजे नहीं दिए।
परिणाम का शेयर पर पड़ा असर
यह दवा फाइजर की सीजेन को खरीदने की 43 अरब डॉलर (करीब 4,000 अरब रुपये) के बड़े सौदे का हिस्सा थी, जिसका लक्ष्य कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में कंपनी को मजबूत करना था।
ट्रायल के नतीजे सामने आने के बाद फाइजर के शेयरों की कीमत में थोड़ी गिरावट भी देखी गई। हालांकि, कंपनी ने उम्मीद नहीं छोड़ी है।
वह इस दवा का मर्क की 'कीट्रुडा' के साथ मिलकर नए कैंसर मरीजों पर पहले से ही टेस्ट कर रही है। कंपनी के मुख्य कैंसर अधिकारी जेफ लेगोस ने कहा कि यह झटका उनकी रिसर्च यात्रा का सिर्फ एक पड़ाव है। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआती अध्ययन से संकेत मिलता है कि यह दवा तब ज्यादा प्रभावी हो सकती है, जब इसे बीमारी के शुरुआती दौर में इस्तेमाल किया जाए या दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर दिया जाए।