भारतीय मूल के 3 शोधकर्ताओं ने OpenAI को किया हैक, जानिए कैसे किया यह कारनामा
क्या है खबर?
भारतीय मूल के 3 साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने जुलाई में एंथ्रोपिक के क्लाउड का इस्तेमाल कर OpenAI के सिस्टम को हैक कर सभी को चौंका दिया। यह एक अधिकृत सिक्योरिटी टेस्ट था, जिसमें शोधकर्ताओं ने सॉफ्टवेयर की एक कमी का फायदा उठाने के लिए क्लाउड की मदद ली। इसके बाद ChatGPT निर्माता के कर्मचारियों के अकाउंट्स और कंपनी के प्राइवेट गिटहब तक पहुंच हासिल कर ली। इस तरह तीनों ने कंपनी के सिस्टम की खामी का पता लगाया।
समय
हैक करने में कितना समय लिया?
यह टेस्ट OpenAI के बग-बाउंटी प्रोग्राम के तहत उसके सिस्टम में सिक्योरिटी कमियां ढूंढ के लिए किया गया था। उन्हें एक कमी मिली और उन्होंने उसका फायदा उठाने के लिए क्लाउड का इस्तेमाल किया।
ये 3 शोधकर्ता साइबर सुरक्षा स्टार्टअप हैक्ट्रॉन AI से हर्ष जायसवाल, मोहन पेधापति और राहुल मैनी थे।
WSJ की रिपोर्ट के अनुसार, OpenAI के प्राइवेट रिपॉजिटरी का एक्सेस पाने के लिए पहली कमजोरी खोजने से लेकर पूरे एक्सपेरिमेंट में 72 घंटे से भी कम समय लगा।
इनाम
टीम को कंपनी से मिला इनाम
रिपोर्ट में बताया है कि इन शोधकर्ताओं ने टेस्ट के दौरान AI टोकन पर 3,000 डॉलर (लगभग 2.5 लाख रुपये) से भी कम खर्च किए।
दूसरी तरफ, कमजोरी खोजने के लिए टीम को OpenAI की ओर से 6,500 डॉलर (लगभग 5.5 लाख रुपये) का इनाम दिया गया।
इस टीम के तीनों शोधकर्ताओं ने कई सालों तक सॉफ्टवेयर की कमियां खोजने, सिस्टम की टेस्टिंग करने और बग-बाउंटी प्रोग्राम में हिस्सा लेने का काम किया है।