अग्नाशय कैंसर DNA बदलकर इलाज का करता है विरोध, शोध में खुलासा
NYU लैंगोन के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि अग्नाशय (पैंक्रियाटिक) कैंसर अपने DNA में बदलाव करके इलाज से कैसे लड़ता है।
उन्होंने 4.43 लाख से ज्यादा कैंसर कोशिकाओं पर बारीकी से शोध किया। इसमें उन्हें कुछ ऐसे आनुवंशिक बदलाव मिले, जिनकी वजह से यह खतरनाक कैंसर शरीर में तेजी से फैलता है और दवाओं का असर नहीं होने देता।
यही वजह है कि पैंक्रियाटिक कैंसर से बचने की दर काफी कम है। बीमारी का पता लगने के 5 साल के भीतर ही लगभग 85 फीसदी मरीज दम तोड़ देते हैं। यह अध्ययन नेचर जेनेटिक्स नाम की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
MYC और TIGIT को बनाया जा सकता है निशाना
शोधकर्ताओं ने पैंक्रियाटिक कैंसर के बढ़ने से जुड़े कई आनुवंशिक बदलावों की पहचान की है, जिनमें MYC और TIGIT भी शामिल हैं। जब उन्होंने MYC को ब्लॉक किया तो सबसे खतरनाक कैंसर कोशिकाएं उतनी आक्रामक नहीं रहीं और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उन्हें पहचानना आसान हो गया।
कुछ कोशिकाओं ने रोग प्रतिरोधक तंत्र के हमलों से बचने के लिए TIGIT को भी बढ़ा लिया था।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर, इन जीन्स को निशाना बनाया जाए तो पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज के नए और बेहतर तरीके सामने आ सकते हैं। इन जीन्स को लक्ष्य करने वाली दवाइयों पर फिलहाल क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं।