IIT या NIT में पढ़े बिना निकि परमार ने AI की तकनीक को दी दिशा
निकि परमार उन खास लोगों में से हैं, जिन्होंने 'अटेंशन इज ऑल यू नीड' नाम के शोध पत्र में ट्रांसफॉर्मर्स तकनीक को दुनिया के सामने लाया।
इसी तकनीक की बदौलत आज ChatGPT जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स काम कर पा रहे हैं। उन्होंने गूगल ब्रेन में भी काम किया है और अब एंथ्रोपिक में AI के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
AI की कहानी अक्सर दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों और सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज से जुड़ी होती है, लेकिन परमार ने न तो किसी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और न ही राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) से पढ़ाई की है।
एसेंशियल AI के लिए जुटाए 5.65 करोड़ डॉलर
परमार का शुरुआती सफर पुणे में रहा, फिर उन्होंने पढ़ाई के लिए अमेरिका की मशहूर यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया (USC) का रुख किया। अमेजन और पबमैटिक जैसी कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने गूगल ब्रेन में अपनी जगह बनाई। इसके बाद उन्होंने 'एसेंशियल AI' की शुरुआत की, जिसमें उन्हें 5.65 करोड़ डॉलर (करीब 530 करोड़ रुपये) की बड़ी रकम, गूगल और एनवीडिया जैसे बड़े टेक दिग्गजों का समर्थन मिला।
उनकी यह यात्रा दिखाती है कि कैसे अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग और कुछ नया करने का जज्बा रखने वाले तकनीकी दुनिया में बड़े बदलाव ला सकते हैं।