क्या सरकार ने नई आधार ऐप को लॉन्च करने में की जल्दबाजी? अलोचकों ने उठाए सवाल
क्या है खबर?
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की ओर से पिछले महीने लॉन्च की गई नई आधार ऐप में शामिल की गए ऑफलाइन सत्यापन सिस्टम से सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। नया सिस्टम यूजर को केंद्रीय आधार डाटाबेस के साथ वास्तविक समय की जांच किए बिना अपनी पहचान साबित करने की अनुमति देता है। नागरिक स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकार समूहों का कहना है कि इन कानूनी बदलावों से आधार के संरचनात्मक जोखिमों का समाधान नहीं होता है।
खतरा
डाटा सुरक्षा ढांचा के बिना बढ़ेगा खतरा
एक्सेस नाउ के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय सलाहकार रमन जीत सिंह चीमा ने टेकक्रंच को बताया कि आधार का ऑफलाइन और निजी क्षेत्र में विस्तार नए खतरे पैदा करता है। खासकर ऐसे समय में जब भारत का डाटा सुरक्षा ढांचा अभी भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने इस योजना को लागू करने के समय पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि केंद्र सरकार को पहले डाटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना का इंतजार करना चाहिए था, ताकि स्वतंत्र समीक्षा हो सके।
समाधान
समस्याओं का नहीं किया गया समाधान
SFLC डॉट इन के कानूनी निदेशक प्रशांत सुगथन ने कहा कि UIDAI ने ऐप को नागरिक सशक्तिकरण के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन आधार डाटाबेस में अशुद्धियों, सुरक्षा खामियों और शिकायत निवारण के कमजोर तंत्र जैसी समस्याओं के समाधान के लिए कुछ खास नहीं किया। 'रीथिंक आधार' के कार्यकर्ताओं का तर्क है कि ऑफलाइन सत्यापन सिस्टम से निजी क्षेत्र द्वारा आधार के उपयोग को दोबारा बढ़ावा मिलने का खतरा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट प्रतिबंधित कर चुका है।
बदलाव
नई ऐप में क्या किए हैं बदलाव?
नई आधार कार्ड ऐप में फोटोकॉपी और मैन्युअल पहचान जांच के बिना सहमति-आधारित ऑफलाइन सत्यापन की सुविधा दी गई है। यूजर्स को यह अधिकार दिया गया है कि वे सत्यापन के लिए कौनसी जानकारी साझा करना चाहते हैं। यह जानकारी होटल, हाउसिंग सोसाइटी, कार्यस्थलों और भुगतान प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा की जा सकती है। इसके अलावा QR कोड के माध्यम से चुनिंदा व्यक्तिगत विवरण साझा कर सकते हैं। इसके साथ पुराने एमआधार ऐप का उपयोग भी जारी रहेगा।