नासा जल्द लॉन्च करेगी GNEISS मिशन, कैसे सैटेलाइट्स के लिए होगा यह लाभकारी?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा ध्रुवीय इलाकों में दिखने वाली रंगीन रोशनी यानी ऑरोरा बोरेलिस को समझने के लिए एक नया मिशन भेजने जा रही है। सदियों से आसमान में दिखने वाली ये रंगीन रोशनियां लोगों को आकर्षित करती रही हैं। अब नासा इनके पीछे छिपे इलेक्ट्रिक करंट और स्पेस फिजिक्स को जानना चाहता है। इसी उद्देश्य से अलास्का से एक खास रॉकेट मिशन लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है, जो वैज्ञानिकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
मिशन
GNEISS मिशन क्या है और कैसे करेगा काम?
इस मिशन का नाम जियोफिजिकल नॉन-इक्विलिब्रियम आयनोस्फेरिक सिस्टम साइंस (GNEISS) रखा गया है, जो ऑरोरा की गहराई से जांच करेगा। नासा फरवरी 2026 की शुरुआत में अलास्का के पोकर फ्लैट से दो साउंडिंग रॉकेट लॉन्च करेगी। ये रॉकेट सीधे सक्रिय ऑरोरा के बीच से गुजरेंगे। हर रॉकेट कई छोटे सेंसर छोड़ेगा, जो बिल्कुल मेडिकल CT स्कैन के समान रेडियो सिग्नल भेजकर इलेक्ट्रॉनों की दिशा, गति और घनत्व को सटीक तरीके से मापेंगे।
लाभ
सैटेलाइट्स में लिए कैसे होगा यह लाभकारी?
GNEISS मिशन से वैज्ञानिकों को स्पेस वेदर को बेहतर और पहले से अधिक सटीक तरीके से समझने में मदद मिलेगी। ऑरोरा से जुड़े इलेक्ट्रिक करंट ऊपरी वायुमंडल में ऊर्जा फैलाते हैं, जिससे सैटेलाइट, GPS और कम्युनिकेशन सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं। इस मिशन से मिले डाटा को नासा अपने EZIE सैटेलाइट के आंकड़ों के साथ मिलाएगा। इससे भविष्य में सैटेलाइट्स को नुकसान से बचाने, समय रहते चेतावनी देने और स्पेस वेदर का भरोसेमंद अनुमान लगाने में आसानी होगी।
योजनाएं
ब्लैक ऑरोरा और आगे की योजनाएं
नासा इस मिशन के साथ ऑरोरा से जुड़े दूसरे रहस्यों पर भी काम कर रहा है। वैज्ञानिक 'ब्लैक ऑरोरा' की जांच भी करना चाहते हैं, जो आसमान में अंधेरे हिस्सों के रूप में दिखाई देते हैं। माना जाता है कि ये इलेक्ट्रिक करंट के उलट बहाव को दिखाते हैं। नासा का कहना है कि ऐसे मिशन अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच के संबंध को समझने में मदद करेंगे और आने वाले समय में सुरक्षित स्पेस मिशन का रास्ता साफ करेंगे।