नासा पृथ्वी की निगरानी के लिए लॉन्च करेगी 2 बड़े सैटेलाइट, क्या होगी खासियत?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा जल्द ही दो बड़े सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रही है। इन मिशनों का मकसद यह समझना है कि गर्म होती दुनिया में पृथ्वी का वातावरण, बर्फ की चादरें और जंगल कैसे बदल रहे हैं। ये प्रोजेक्ट अर्थ सिस्टम एक्सप्लोरर्स प्रोग्राम के तहत चुने गए हैं। नासा का कहना है कि सटीक और नए डाटा की मदद से मौसम का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा और जलवायु बदलाव को समझने में बड़ी सहायता मिलेगी।
STRIVE
STRIVE मिशन की खास भूमिका
पहला सैटेलाइट स्ट्रैटोस्फीयर ट्रोपोस्फीयर रिस्पॉन्स यूजिंग इन्फ्रारेड वर्टिकल-रिजॉल्व्ड लाइट एक्सप्लोरर (STRIVE) कहलाता है, जो ऊपरी ट्रोपोस्फीयर से लेकर मेसोस्फीयर तक तापमान, ओजोन, एरोसोल और अन्य गैसों को मापेगा। यह इन्फ्रारेड तकनीक और वर्टिकल रेजोल्यूशन सेंसर का उपयोग करेगा। इससे वैज्ञानिक जान पाएंगे कि ऊपरी वातावरण में होने वाले बदलाव नीचे के मौसम और जलवायु को कैसे प्रभावित करते हैं। यह डाटा क्लाइमेट मॉडल को मजबूत बनाने और भविष्य के मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा।
EDGE
EDGE सैटेलाइट क्या करेगा?
दूसरे सैटेलाइट का नाम अर्थ डायनेमिक्स जियोडेटिक एक्सप्लोरर (EDGE) होगा, जो पृथ्वी की सतह पर फोकस करेगा। यह जंगलों का तीन-आयामी नक्शा तैयार करेगा और ग्लेशियर, आइस शीट तथा समुद्री बर्फ की ऊंचाई मापेगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बर्फ कितनी तेजी से पिघल रही है और समुद्र स्तर में कितना बदलाव हो रहा है। इसके लिए एडवांस्ड जियोडेटिक तकनीक और सटीक सेंसर का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे हाई रेजोल्यूशन डाटा मिलेगा।
लॉन्च
लॉन्च और आगे की योजना
ये दोनों सैटेलाइट अभी तकनीकी समीक्षा और फंडिंग मंजूरी के चरण में हैं। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद इन्हें 2030 से पहले लॉन्च करने की योजना है। हर मिशन की लागत करीब 35.5 करोड़ डॉलर (लगभग 3,200 करोड़ रुपये) तय की गई है, जिसमें लॉन्च खर्च शामिल नहीं है। लॉन्च के बाद ये पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए ग्राउंड स्टेशनों को लगातार डाटा भेजेंगे। वैज्ञानिक इस जानकारी का उपयोग जलवायु अध्ययन और पर्यावरण मूल्यांकन में करेंगे।