2028 में इंसानों को चंद्रमा पर भेजना चाहती है नासा, क्या लैंडर हो पाएंगे तैयार?
क्या है खबर?
नासा का आर्टेमिस प्रोग्राम अब चांद पर इंसानों को उतारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आर्टेमिस-2 मिशन के बाद एजेंसी का पूरा ध्यान अगले चरण पर है। योजना के अनुसार, आर्टेमिस-3 मिशन, 2027 के अंत में पृथ्वी की कक्षा में टेस्ट करेगा। इसके बाद 2028 में चांद पर लैंडिंग की तैयारी की जाएगी। यह पूरा कार्यक्रम अंतरिक्ष में बड़ी वापसी के रूप में देखा जा रहा है, जिसे भविष्य के बड़े मिशनों की शुरुआत माना जा रहा है।
तैयारी
क्या लैंडर समय पर तैयार हो पाएंगे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लूनर लैंडर तय समय तक तैयार हो पाएंगे? नासा ने दो कंपनियों को यह जिम्मेदारी दी है, लेकिन दोनों के सामने तकनीकी और समय से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। लैंडर को न सिर्फ चांद तक पहुंचना है, बल्कि अंतरिक्ष में जुड़ने और सुरक्षित उतरने जैसी जटिल प्रक्रियाएं भी पूरी करनी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों की प्रगति, टेस्टिंग और तकनीकी सुधार बेहद अहम माने जा रहे हैं।
स्पेस-X
स्पेस-X का प्रोजेक्ट अभी अधूरा
स्पेस-X का स्टारशिप HLS प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। कंपनी इंजन और सॉफ्टवेयर सिस्टम की जांच जैसे कई अहम टेस्ट कर चुकी है। इसके बावजूद ऑर्बिटल फ्यूलिंग, डॉकिंग और लगातार सफल उड़ानों का प्रदर्शन अभी बाकी है। जब तक ये सभी टेस्ट पूरी तरह सफल नहीं होते, तब तक इस लैंडर को मिशन के लिए पूरी तरह तैयार और भरोसेमंद नहीं माना जा सकता है।
ब्लू ओरिजन
ब्लू ओरिजन को भी करनी है तैयारी पूरी
ब्लू ओरिजन भी अपने ब्लू मून लैंडर पर काम कर रही है, लेकिन उसका सिस्टम भी अभी शुरुआती चरण में है। कंपनी पहले छोटे बिना क्रू वाले लैंडर से शुरुआत कर रही है, जिसकी टेस्टिंग और तैयारी जारी है। इसके साथ ही, उसके न्यू ग्लेन रॉकेट में आई तकनीकी दिक्कतें भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में ब्लू ओरिजन को भी तय समय सीमा के भीतर अपनी तकनीक और सिस्टम को पूरी तरह तैयार करना होगा।
अन्य
आने वाले समय में तय होगी तस्वीर
नासा ने साफ किया है कि वह उसी लैंडर का इस्तेमाल करेगा, जो समय पर पूरी तरह तैयार होगा। इससे दोनों कंपनियों के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा बन गई है। 2027 के अंत तक होने वाले टेस्ट और मिशन तैयारी से यह साफ हो जाएगा कि कौन सा लैंडर सबसे बेहतर साबित होता है। फिलहाल स्थिति यह है कि दोनों प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अभी पूरी तरह तैयार कोई भी लैंडर नहीं माना जा रहा है।